
अहमदाबाद। गुजरात के कच्छ जिले में रविवार तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए। गांधीनगर स्थित भूकंप विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईएसआर) के मुताबिक, भूकंप के कारण किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.4 मापी गई।
गांधीनगर आईएसआर ने बताया कि भूकंप सुबह 3.58 बजे आया, जिसका केंद्र लखपत से 53 किलोमीटर उत्तर-उत्तर पूर्व में स्थित था। इससे पहले 27 अक्टूबर को राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र के अमरेली जिले में 3.7 तीव्रता का भूकंप आया था।
हाल ही में कच्छ में आए भूकंप
17 अक्टुबर 2024 : गुजरात के कच्छ जिले में सुबह करीब 3 बजकर 54 मिनट पर भूकंप के तेज झटके महसूस हुए थे। इसकी तीव्रता 4 मापी गई थी। इसका केंद्र बिंदु कच्छ के खावडा से करीब 47 किलोमीटर उत्तर पूर्व में था।
23 सितंबर 2024 : गुजरात के कच्छ जिले में सुबह 10 बजकर पांच मिनट पर 3.3 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए थे। इसका केंद्र रापर के 12 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण पश्चिम में था।
200 साल में 9 बार आए भीषण भूकंप
गुजरात में भूकंप का खतरा बहुत अधिक रहता है। गुजरात राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (जीएसडीएमए) के मुताबिक, पिछले 200 साल में राज्य में नौ बार भीषण भूकंप आए हैं। इसमें 2001 में कच्छ में आया भूकंप पिछली दो शताब्दियों में भारत में आया तीसरा सबसे बड़ा तथा दूसरा सबसे विनाशकारी भूकंप था।
2001 में आए भूकंप ने ली थी हजारों लोगों की जान
गुजरात में 26 जनवरी 2001 को 6.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र कच्छ के भचाउ के पास था। इससे पूरा राज्य प्रभावित हुआ था। जीएसडीएमए के आंकड़ों के अनुसार, इस भूकंप से करीब 13,800 लोग मारे गए थे और 1.67 लाख लोग घायल हुए थे।
क्या होता है रिक्टर स्केल?
भूकंप की तीव्रता नापने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। रिक्टर स्केल मूल रूप से भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए डिजाइन किया गया था। इसकी खोज अमेरिकी वैज्ञानिक चार्ल्सा रिक्टेर और बेनो गुटरबर्ग ने 1935 में की थी। उनका सोचना था कि, भूकंप की तीव्रता को एक संख्या में व्यक्त किया जाना चाहिए ताकि इसकी तुलना अन्य भूकंपों से की जा सके।
आखिर क्यों आते हैं भूकंप ?
भूकंप आने के पीछे की वजह पृथ्वी के भीतर मौजूद प्लेटों का आपस में टकराना है। हमारी पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती हैं। जब ये आपस में टकराती हैं, तब फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है। जिसकी वजह से सतह के कोने मुड़ जाते हैं और वहां दबाव बनने लगता है। ऐसी स्थिति में प्लेट के टूटने के बाद ऊर्जा पैदा होती है, जो बाहर निकलने के लिए रास्ता ढूंढती है। जिसकी वजह से धरती हिलने लगती है।
कैसे मापते हैं भूकंप की तीव्रता
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र (एपीसेंटर) से मापा जाता है। भूकंप को लेकर चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है। मैक्रो सेस्मिक जोनिंग मैपिंग के अनुसार इसमें जोन-5 से जोन-2 तक शामिल है। जोन 5 को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है और इसी तरह जोन दो सबसे कम संवेदनशील माना जाता है।
किस तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक है
• 0 से 1.9 तीव्रता का भूकंप काफी कमजोर होता है। सीज्मोग्राफ से ही इसका पता चलता है।
• वहीं 2 से 2.9 तीव्रता का भूकंप रिक्टर स्केल पर हल्का कंपन करता है।
• 3 से 3.9 तीव्रता का भूकंप आने पर ऐसा लगता है जैसे कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर गया हो।
• 4 से 4.9 तीव्रता का भूकंप आने पर खिड़कियां टूट सकती हैं। साथ ही दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं।
• 5 से 5.9 तीव्रता का भूकंप आने पर घर का फर्नीचर हिल सकता है।
• 6 से 6.9 तीव्रता का भूकंप आने पर इमारतों की नींव दरक सकती है।
• 7 से 7.9 तीव्रता का भूकंप खतरनाक होता है। इससे बिल्डिंग गिर जाती हैं और जमीन में पाइप फट जाती है।
• 8 से 8.9 तीव्रता का भूकंप काफी खतरनाक होता है। जापान, चीन समेत कई देशों में 8.8 से 8.9 तीव्रता वाले भूकंप ने खूब तबाही मचाई थी।
• 9 और उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आने पर पूरी तबाही होती है। इमारतें गिर जाती है। पेड़ पौधे, समुद्रों के नजदीक सुनामी आ जाती है।