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ओडिशा के साही जाता और उत्तरी केरल के थैय्यम मुखौटा भक्ति नृत्य में दिखी भव्यता

जनजातीय संग्रहालय में मुखौटा प्रदर्शनी और अलग-अलग राज्यों के नृत्यरूपों की प्रस्तुति 29 तक

ओडिशा के गौरांग नायक अपने साथियों के साथ जैसे ही मंच पर बड़े- बड़े भव्य मुखौटों के साथ आए दर्शक हैरानी से उन्हें देखते रह गए। मौका था, साही जाता की प्रस्तुति का। लोक नृत्य में जात्रा भारत के पूर्वी क्षेत्र का लोक कलामंच का एक लोकप्रिय रूप है। धार्मिक रैली एवं अनुष्ठानों में साही जाता नृत्य का प्रदर्शन होता है, जिसमें कलाकार भगवान श्रीगणेश, नरसिंह एवं देवी के मुखौटों का उपयोग कर नृत्य में सहभागिता करता है। जनजातीय संग्रहालय में जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा 29 सितंबर तक मुखौटों पर आधारित प्रदर्शनी व नृत्यों का संयोजन किया गया है। इसी मौके पर यह प्रस्तुतियां दीं गईं।

8 देशों की मुखौटा प्रदर्शनी देखने का मौका

केरल के निशानथ केएम एवं साथी, द्वारा थैय्यम नृत्य प्रस्तुत किया। थैय्यम केरल का पारंपरिक लोक नृत्य और उत्तरी केरल का भक्ति नृत्य है, जिसमें वर्ष में एक बार 25 से अधिक नृत्यों का प्रदर्शन किया जाता है। प्रति वर्ष अक्टूबर माह में उत्तरी केरल की ओर से फसल कटाई के बाद घरों में थैय्यम नृत्य किया जाता है और भगवान को नृत्य के माध्यम से धन्यवाद ज्ञापित किया जाता है। ट्राइबल म्यूजियम में हिमालय विश्व संग्रहालय, सिक्किम के सहयोग से भारत के 7 राज्यों सहित 8 देशों की कलाओं में मुखौटे प्रतिरूप प्रदर्शनी का संयोजन किया गया है।

28 से 29 अक्टूबर तक इन नृत्यों का होगा प्रदर्शन

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों अंतर्गत छबिलदास विष्णु गवली एवं साथी, महाराष्ट्र द्वारा भवाड़ा नृत्य, निशानथ केएम एवं साथी, केरल द्वारा थैय्यम नृत्य, पवनभाई रामूभाई बागुल एवं साथी, गुजरात द्वारा भवाड़ा नृत्य पेश किया जाएगा। जोगिंदर सिंह एवं साथी, हिमाचल प्रदेश द्वारा डग्याली नृत्य, छबीलाल प्रधान एवं साथी, सिक्किम द्वारा बज्रयोगिनी नृत्य, चाउ सरथाम नामचूम द्वारा खामटी जनजातीय का नृत्य का प्रदर्शन होगा। प्रदर्शनी दोपहर 2 बजे से व नृत्य शाम 6 बजे से होंगे।

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