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फायर ब्रिगेड में GPS लगेगा, इससे पता चलेगा कितनी देर में पहुंचा वाहन

अपडेट सिस्टम : पुलिस रेडियो से जुड़ेंगे फायर ब्रिगेड केंद्र

अशोक गौतम, भोपाल। गुना बस हादसा हो या फिर सतपुड़ा भवन का अग्निकांड। देर से फायर ब्रिगेड पहुंचने पर नगरीय प्रशासन विभाग को कोप भाजन बनना पड़ा था। आरोप हैं कि फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंचे, जिससे बड़ी घटना पर काबू करने में मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि ऐसे कई मौकों पर फायरकर्मी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचने का दावा करते हैं। इन विवादों का पटाक्षेप करने के लिए सरकार अब फायर वाहनों में जीपीएस लगाने का प्लान कर रही है। इससे पता चल जाएगा कि फायर केंद्र से किस नंबर का वाहन कितने बजकर कितने मिनट पर घटनास्थल के लिए रवाना हुआ है और मौके पर कब पहुंचा।

इससे यह भी फायदा होगा कि घटनास्थल पर अगर कहीं ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है, तो उसे भी पुलिस तत्काल दूर कर सकेगी। इसमें वाहनों की ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग घटना के समय और घटना के बाद भी की जा सकेगी।

फायर ब्रिगेड के साथ पुलिस को मिलेगी घटना की सूचना

नए वाहन खरीदे जाएंगे उनमें जीपीएस जरूरी किया जाएगा। इसके साथ ही फायर ब्रिगेड को वायरलेस से भी जोड़ा जाएगा। इससे जोड़ने से पुलिस और फायर ब्रिगेड को एक साथ आग की सूचना मिल सकेगी। आग बुझाने के दौरान फायरकर्मी और पुलिसकर्मी एक साथ आपस में बात कर सकेंगे। इसके अलावा फायर वाहनों को आने-जाने में दिक्कत होगी तो वे इसकी सूचना भी थाने अथवा पॉइंट पर तैनात पुलिसकर्मी को दे सकेंगे।

ज्यादा क्षमता वाले फायर वाहन खरीदे जाएंगे

शहरों का जिस तरह से मल्टी स्टोरी का कल्चर आ रहा है, उसके हिसाब से फायर वाहन नहीं है। अब नए वाहन और ज्यादा क्षमता वाले फायर वाहन खरीदे जाएंगे, जिससे कम से कम एक फायर वाहन 20 मिनट तक लगातार आग बुझाने का काम कर सके। वर्तमान में जो फायर वाहन उपलब्ध हैं उनकी क्षमता अधिकतम पांच से दस मिनट के लिए होती है। इन वाहनों के साथ-साथ टैंकरों को भी भेजना पड़ता है।

फायर सिस्टम को मजबूत करने खर्च होंगे 400 करोड़

प्रदेश में फायर सिस्टम को मजबूत करने के लिए चार सौ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें 25 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार को मिलाना होगा। इस फायर सिस्टम को मजबूत करने के लिए क्या काम किए जाएंगे, इसको लेकर केंद्र सरकार ने राज्य से प्लान बुलवाए हैं। बताया जाता है कि नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने एक प्रस्ताव बनाकर वित्त विभाग को सौंपा है, क्योंकि इसमें करीब सौ करोड़ रुपए राज्य सरकार को लगाना होगा। वित्त विभाग की अनुमति मिलने और लोकसभा चुनाव के बाद इसे अमलीजामा पहनाया जा सकेगा।

बेहतर होगा फायर कंट्रोल सिस्टम

फायर कंट्रोल सिस्टम अत्याधुनिक सुविधाओं से मजबूत बनाने पर काम किया जा रहा है। अब फायर ब्रिगेड केंद्रों में बड़े वाहनों को खरीदा जाएगा, जिनकी क्षमता ज्यादा होगी। इसके साथ ही फायरकर्मियों को उपकरण और ट्रेनिंग भी दी जाएगी। -असित खरे, कार्यपालन यंत्री, नगरीय प्रशासन विभाग

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