
नई दिल्ली। गुजरात के गोधरा कांड के 14 गवाहों की सुरक्षा हटा दी गई है। यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से लिया गया है। गृह मंत्रालय ने विशेष जांच दल (SIT) की सिफारिश पर यह कदम उठाया है। इन गवाहों को पहले सीआईएसएफ (CISF) के 150 जवानों द्वारा सुरक्षा प्रदान की जा रही थी, लेकिन अब उन्हें सुरक्षा कवर से हटा दिया गया है।
SIT की रिपोर्ट के आधार पर हुआ फैसला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोधरा कांड की जांच कर रही एसआईटी ने 10 नवंबर 2023 को गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट भेजी थी। इसमें गवाहों की सुरक्षा हटाने की सिफारिश की गई थी। मंत्रालय ने इस सिफारिश को स्वीकार करते हुए 14 गवाहों की सुरक्षा हटा दी है।
किन गवाहों की सुरक्षा हटी?
जिन 14 लोगों की सुरक्षा हटाई गई है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- हबीब रसूल सय्यद
- अमीनाबेन हबीब रसूल सय्यद
- अकीलाबेन यासीनमिन
- सैय्यद यूसुफ भाई
- अब्दुलभाई मरियम अप्पा
- याकूब भाई नूरान निशार
- रजकभाई अख्तर हुसैन
- नजीमभाई सत्तार भाई
- माजिदभाई शेख यानुश महामद
- हाजी मयुद्दीन
- समसुद्दीन फरीदाबानू
- समदुद्दीन मुस्तफा इस्माइल
- मदीनाबीबी मुस्तफा
- भाईलालभाई चंदूभाई राठवा
इन गवाहों को पहले सुरक्षा दी गई थी ताकि वे किसी दबाव के बिना अपने बयान दे सकें। लेकिन अब केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा हटा दी है।
क्या था गोधरा कांड?
27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस की एस-6 बोगी में आग लगा दी गई थी। इस ट्रेन में अयोध्या से लौट रहे कारसेवक यात्रा कर रहे थे। इस भीषण हादसे में 58 लोगों की जलकर मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे। पूरे राज्य में हिंसा फैली, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई और हजारों घर-प्रॉपर्टी जला दी गईं।
गोधरा कांड के बाद हुए दंगे
गोधरा कांड के बाद गुजरात में हिंसा भड़क उठी, जिसे देश के सबसे बड़े सांप्रदायिक दंगों में से एक माना जाता है।
मारे गए लोग: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन दंगों में 1044 लोगों की जान गई थी, जिसमें 790 मुस्लिम और 254 हिंदू शामिल थे।
लूटपाट और आगजनी: सैकड़ों घर और दुकानें जला दी गईं।
बलात्कार और उत्पीड़न: कई महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं भी सामने आईं।
विस्थापन: करीब 2 लाख लोगों को अपना घर छोड़कर दूसरी जगहों पर बसना पड़ा।
गवाहों की सुरक्षा हटाने पर सवाल
गवाहों की सुरक्षा हटाने के फैसले के बाद इस पर सवाल भी उठने लगे हैं। कई सामाजिक संगठनों और गवाहों के परिजनों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि, इन गवाहों पर खतरा बना हुआ है और सरकार को उनकी सुरक्षा जारी रखनी चाहिए थी।
हालांकि, गृह मंत्रालय का कहना है कि सुरक्षा समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए गवाहों पर किसी तरह का खतरा नहीं है।
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