
मिथिलेश यादव, भोपाल। भारतीय वायु सेना की 91वीं वर्षगांठ के मौके पर 30 सितंबर को राजधानी भोपाल में एयर शो होने वाला है। इस फ्लाय पास्ट में देश के फाइटर और कैरियर एयरक्राफ्ट के साथ ही 16 सदस्यीय सारंग डिस्प्ले टीम भी शामिल हैं। फ्लाय पास्ट से पहले गुरुवार को हुई फुल ड्रेस रिहर्सल में वायुसेना की सारंग डिस्प्ले टीम ने भी अपना पराक्रम दिखाया और अपने हेलिकॉप्टर्स के जरिए हैरतअंगेज करतबों से दर्शकों का दिल जीत लिया।

बता दें कि सारंग दुनिया की पहली और एकमात्र हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम है, जो देश ही नहीं विदेश में भी अपने स्टंट और फॉर्मेशन बनाने के लिए विश्व प्रसिद्ध है। हवा में तिरंगा हो या अन्य आकृतियां, जब सारंग अपना जौहर दिखाता है तो देखने वाले दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर हो जाते हैं। पीपुल्स अपडेट की टीम पहुंची फ्लाय पास्ट से पहले सेना के 3 ईएमई सेंटर बैरागढ़, जहां सारंग डिस्प्ले टीम अपने हेलिकॉप्टर्स और क्रू के साथ मौजूद थी। पेश हैं इस बातचीत के मुख्य अंश….
हेलिकॉप्टर से स्टंट ज्यादा कठिन
पीपुल्स अपडेट को स्क्वाड्रन लीडर क्षिप्रा दीप ने बताया कि इस स्क्वॉड में कुल 4 एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर्स हैं, जो हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड ने ध्रुव नाम से सन् 2002 में बनाना शुरू किया था। उनका कहना है कि फाइटर प्लेन और हेलिकॉप्टर दोनों मे स्टंट के दौरान खतरा बना रहता है, लेकिन हेलिकॉप्टर से स्टंट ज्यादा कठिन होते हैं। इसकी सबसे अहम वजह है उड़नखटोलों के बीच की बेहद कम दूरी।

सारंग के 8 पायलट्स में से एक क्षिप्रा कहती हैं कि वे ऑटो पायलट और डबल इंजन से लैस हेलिकॉप्टर्स को एक्सट्रीम लिमिट तक लेकर जाती हैं। हेलिकॉप्टर में ऑल्टीट्यूड (अलग-अलग ऊंचाई और हवा) का असर होता है। सारंग टीम की फ्लाइट लेफ्टिनेंट पल्लवी सांगवान का कहना है कि टीम का मुख्य काम युवाओं को प्रोत्साहित करना है, ताकि वे वायुसेना की तरफ आकर्षित हो उसे जॉइन करें। इस टीम को इंडियन एयरफोर्स का ब्रांड एंबेस्डर कहा जाता है।

सबसे बेस्ट को ही मिलती है टीम में जगह
इस टीम को लीड कर रहे ग्रुप कैप्टन एसके मिश्रा का दावा है कि दुनिया में इस तरह का काम कोई और हेलिकॉप्टर टीम नहीं करती है.. उनके मुताबिक हेलीकॉप्टर पर डिस्पले एक अलग ही लेवल का चैंलेंज होता है। सारंग की टीम के 8 पायलट और मेंटनेंस की टीम एयरफोर्स के सबसे काबिल हेलिकॉप्टर पायलट्स और मेंटनेंस टीम में से चुने जाते हैं। सारंग की टीम की ट्रेनिंग भी एयरफोर्स की ट्रेनिंग से काफी अलग और कठिन होती है। यही वजह है कि फ्लाइंग के दौरान सारंग की टीम परफेक्शन के साथ अपने काम को अंजाम दे पाती है।
सारंग में शामिल हेलीकॉप्टर के फ्लीट (बेड़े) को डिस्पले के अलावा डिजास्टर रिलीफ, डिफेंस सर्विसेज और वार फील्ड में भी काम मे लिया जाता है। हेलिकॉप्टर स्टंट खतरनाक तो होता है, लेकिन इसका अलग रोमांच भी है। यही वजह है कि इस टीम के मेंबर्स फिल्मी अंदाज में ये बात कहने से नहीं चूकते- :” रिस्क है, तभी तो इश्क है”।


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