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आस्था: हाईकोर्ट परिसर में बने मंदिर, मजार में पूरी होती है पक्षकारों की गुहार

हनुमान मंदिर और कचहरी वाले बाबा की दरगाह पर सुनवाई से पहले श्रद्धालु लगाते हैं अर्जी

योगेश सोनी-जबलपुर। हाईकोर्ट आने वाले पक्षकारों और वकीलों के लिए परिसर में स्थित हनुमान मंदिर और परिसर के बाहर मौजूद कचहरी वाले बाबा की दरगाह आस्था का अनूठा केंद्र है। मंदिर और दरगाह महज 5 सौ मीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसी मान्यता है कि मुकदमों की सुनवाई से पहले यदि सच्चे मन से इन दोनों स्थानों पर अर्जी लगाई जाए तो जीत की गारंटी पक्की रहती है। हर रोज बड़ी संख्या में लोग यहां फरियाद लगाने पहुंचते हैं।

जस्टिस हिदायतउल्लाह ने बनवाया था मंदिर 

हाईकोर्ट परिसर के हनुमान मंदिर के बारे में मंदिर के पुजारी अखिलेश पांडेय बताते हैं कि मप्र के नया राज्य बनने के बाद हाईकोर्ट की स्थापना जबलपुर में हुई। पहले चीफ जस्टिस एम हिदायत उल्लाह ने ही इस हनुमान मंदिर की स्थापना कराई थी। बाद में जस्टिस हिदायत उल्लाह सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस भी बने। हर जाति और धर्म के लोग हर रोज मंदिर आते हैं। खासतौर पर मंगलवार और शनिवार को यहां पर सुबह से भक्तों का तांता लगा रहता है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में विराजमान हनुमानजी लोगों को न्याय दिलाते हैं। यहां पर लगाई गई फरियाद हर हाल में पूरी होती है। जिनके मुकदमे कोर्ट में लंबित हैं, वे अपना दुखड़ा अर्जी के रूप में लिखकर हनुमानजी के चरणों में रखते हैं, ताकि उनकी फरियाद पूरी हो सके।

टीपू सुल्तान के फौजियों ने बनाई थी दरगाह

हाईकोर्ट के सामने स्थित हजरत ख्वाजा अमीन उद्दीन चिश्ती रहमत उल्लाह अलैह कचहरी वाले बाबा की करीब दो सौ साल पुरानी दरगाह है। दरगाह के खादिमे आला चंगेज खान ने बताया कि कर्नाटक के श्रीरंगपट्टना में टीपू सुल्तान की मौत के बाद उनके सैनिकों को अग्रेजों ने देश के अलग- अलग इलाकों में छोड़ा। अंग्रेजों का मकसद था कि सैनिक एकजुट न हो जाएं। जबलपुर भेजे गए रहीम खान, अजीज खान व अन्य ने मिलकर इस दरगाह को बनाया था। चूंकि यह दरगाह अंग्रेजों की कचहरी के ठीक बाजू से थी, इसी कारण उसका नाम कचहरी वाले बाबा के नाम पर पड़ा।

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