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इसे आस्था कहें या अंधविश्वास ? रतनगढ़ माता मंदिर में बुजुर्ग ने जीभ काटकर देवी मां के चरणों में चढ़ाई

शारदीय नवरात्रि में मध्य प्रदेश के भिंड जिले में देवी मां को प्रसन्न करने के लिए एक भक्त की अनोखी आस्था देखने को मिली। मामला लहार स्थित रतनगढ़ माता मंदिर का है। यहां एक बुजुर्ग ने अपनी जीभ काटकर देवी मां के चरणों में चढ़ा दी। हैरानी की बात यह है कि जीभ काटने के बाद उसने खुद ही अपना इलाज कर लिया।

क्या है मामला ?

जानकारी देते हुए पुजारी जयकिशन ने बताया कि नवदुर्गा के अवसर पर मंदिर परिसर में घास बोई गई थी। बीती रात पंचमी के अवसर पर घास की झांकी सजाई गई, जिसके श्रद्धालु दर्शन कर लाभ ले रहे थे। तभी मंदिर के पास रहने वाले रामशरण भगत की नजर जवारों पर पड़ी और उसने अपनी जीभ काटकर मंदिर में मां रतनगढ़ देवी की प्रतिमा के सामने चढ़ा दी। भक्त ने अपनी जीभ तीन इंच से ज्यादा काट ली थी और मंदिर के सामने रखे घड़े को खून से भर दिया था।

जैसे ही यह खबर लहार नगर में फैली मंदिर पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। वहीं, आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यह उनकी आस्था है और जब मन में आया तो उन्होंने अपनी जीभ काटकर उन्हें चढ़ा दी। लोगों ने यह भी कहा कि हमें विश्वास है, उन्हें भी विश्वास है कि उनकी जीभ वापस आएगी और वह फिर से बोलेंगे।

2015 में हुआ था मंदिर का निर्माण

जानकारी के अनुसार, लहार नगर के वार्ड 15 में मां रतनगढ़ देवी मंदिर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण स्वर्गीय धनीराम शाक्य ने अपनी निजी भूमि पर 2015 में कराया था। 21 मार्च 2015 को मंदिर में देवी मां की प्रतिष्ठा की गई थी। मंदिर में पुजारी के रूप में जयकिशन शाक्य को नियुक्त किया गया था।

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