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बच्चों के लिए बुधनी में बने एजुकेशनल टॉयज, सजावट के लिए मोम के लड्डू, टेराकोटा के दीये और मूर्ति खास

गौहर महल में मप्र हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम द्वारा दीपोत्सव प्रदर्शनी का आयोजन
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बच्चों के लिए बुधनी में बने एजुकेशनल टॉयज, सजावट के लिए मोम के लड्डू, टेराकोटा के दीये और मूर्ति खास

अनुज मीणा- दीपावली से पहले मप्र हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम द्वारा गौहर में दीपोत्सव प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों के 71 शिल्पियों ने दीपावली के लिए टेराकोटा से तैयार दीये, लैंप, मूर्तियों सहित विभिन्न डेकोरेटिव आयटम्स प्रदर्शित किए हैं। फेस्टिव सीजन में महिलाओं के लिए बाग, चंदेरी, महेश्वरी प्रिंट से तैयार सूट और साड़ियों के कलेक्शन के साथ बीड्स से तैयार ज्वेलरी भी उपलब्ध है। वहीं, बच्चों के लिए बुधनी के लकड़ी के खिलौने के स्टॉल भी शिल्पियों ने लगाए हैं। 30 अक्टूबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में विजिटर्स दोपहर 12 से रात 9 तक खरीदारी कर सकते हैं।

दुधी की लकड़ी से बनते हैं बुधनी के खिलौने

बुधनी के शिल्पी महेश विश्वकर्मा ने लकड़ी के खिलौनों का स्टॉल लगाया है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के सदस्य पिछली तीन पीढ़ियों से लकड़ी के खिलौने बनाने का काम करते आ रहे हैं। इन खिलौनों की खासियत यह है कि ये सफेद रंग की दुधी की लकड़ी से बनते हैं। इसमें गांठ और रेशे नहीं होते और पूरी लकड़ी एक जैसी होती है, जिससे खिलौने बनाने में आसानी होती है और ये सुंदर भी दिखते हैं। ये लकड़ी औषधीय गुणों से भी भरपूर होती है। पूर्व में हमारे द्वारा लट्टू और अन्य खिलौने बनाए जाते थे। अब सरकार ने समूह गठित कर सीएनसी कटिंग मशीन उपलब्ध करा दी है। इस मशीन की मदद से अब हम एजुकेशनल खिलौने भी बनाते हैं।

8 घंटे रोशनी देने में सक्षम हैं मोम के लड्डू

प्रदर्शनी में दीपावली के अवसर पर मोम से पूरे घर को जगमग करने के लिए विशेष मोम से तैयार लड्डूओं को प्रदर्शित किया गया है। यह लड्डू भोपाल की डॉ. काजला ने तैयार किए हैं। उन्होंने बताया कि यह देखने में बूंदी के फ्रेश लड्डूओं की तरह है। एक लड्डू को बनाने में लगभग 50 ग्राम मोम का इस्तेमाल होता है। इनमें 30 प्रतिशत बी- वैक्स का उपयोग किया गया है। एक लड्डू लगभग 8 घंटे रोशनी देने में सक्षम है।

टेराकोटा से तैयार प्रतिमाएं और दीये

भोपाल की मुस्कान श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने फाइन आर्ट में मास्टर्स किया है और वे पिछले 10 साल से टेराकोटा से सामग्री निर्माण कर रही हैं। इनमें ऑयल पेंट ओर फेब्रिक रंगों का उपयोग किया। उन्होंने बताया कि उनके पास शुभ-लाभ, वंदनवार, लक्ष्मीजी, गणेशजी की कई तरह की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। साथ ही डिफरेंट तरह के दीये, लैंप भी टेराकोटा से बनाए हैं।

पंचधातु से तैयार किया राम दरबार

प्रदर्शनी में टीकमगढ़ के कलाकारों द्वारा तैयार राम दरबार यहां प्रदर्शित किया गया है। लगभग 26 हजार रुपए की कीमत का यह राम दरबार पंचधातु से तैयार किया गया है, जो लगभग 4 किलो से अधिक वजनी है। मूर्ति के भीतरी ढांचे में मजबूती के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग किया।

People's Reporter
By People's Reporter

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