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प्रोजेक्ट में पहले 390 पेड़ काटने की बताई थी जरूरत, अब NGT में कहा-110 ही काटेंगे

प्रोफेसर कॉलोनी में हाउसिंग बोर्ड बनाएगा कलेक्ट्रेट की बिल्डिंग

शाहिद खान-भोपाल। राजधानी में बीआरटीएस, स्मार्ट सिटी और मेट्रो प्रोजेक्ट सहित सड़क और इमारतें बनाने के नाम पर पिछले एक दशक में तीन लाख से ज्यादा पेड़ों को काट दिया गया। जबकि हकीकत यह है कि अगर सही प्लानिंग की जाती तो इनमें से 60 फीसदी पेड़ों को बचाया जा सकता था, लेकिन निर्माण एजेंसियों के हमेशा से पेड़ सबसे सॉफ्ट टारगेट रहे हैं। बेवजह पेड़ों को काटा गया। ग्रीन सिटी में हरियाली कम हुई। इसकी बानगी प्रोफेसर कॉलोनी में एमपी हाउसिंग बोर्ड का कलेक्ट्रेट बिल्डिंग प्रोजेक्ट है।

इसकी प्रोजेक्ट डीपीआर में 390 पेड़ों को काटने की जरूरत बताई गई, लेकिन जब मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) की चौखट तक पहुंचा, तो हाउसिंग बोर्ड बैकफुट पर आ गया। अफसरों ने आनन-फानन में जमीनी सर्वे कर प्रोजेक्ट की राह में आ रहे पेड़ों की गिनती की, तो आंकड़ा 110 पर सिमट गया। यानी 280 पेड़ों की बेवजह ही बलि चढ़ाए जाने की तैयारी की गई थी।

बता दें कि नए और पुराने शहर के बीच बसी प्रोफेसर कॉलोनी के रीडेंसिफिकेशन का पूरा प्लान तैयार हो चुका है। यहां कुछ पुराने बंगलों को तोड़कर नया कलेक्टोरेट और कंपोजिट ऑफिस कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। एक हैबिटेट सेंटर और स्टेट गेस्ट हाउस भी बनेगा। ट्रैफिक के संभावित दबाव को देखते हुए छोटे तालाब पर एक नया ब्रिज भी बनाया जाएगा। पूरे इलाके में कुछ नई सड़कें भी बनेंगी। कुल मिलाकर इस पूरे क्षेत्र का नक्शा बदलने वाला है। विकास का यह खाका हाउसिंग बोर्ड ने खींचा था और इस प्रोजेक्ट के लिए 390 पेड़ों को काटने की प्लानिंग की गई थी।

यह प्लानिंग सामने आने के बाद एन्वायरमेंट एक्टिविस्ट नितिन सक्सेना के साथ ही भोपाल सिटीजन फोरम ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था कि यह प्रोजेक्ट, वेटलैंड रूल्स का उल्लंघन है और पेड़ काटने से पर्यावरण को नुकसान होगा। इसके बाद हाउसिंग बोर्ड बैकफुट पर आ गया और ट्रिब्युनल में हलफनामा दायर कर काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या को लेकर सफाई दी है। इधर, सीनियर सिटीजन फोरम से जुड़ी वर्षा नावलेकर ने कहा कि एनजीटी ने हमारा पक्ष सुनने के बाद कई पेड़ों को अनावश्यक रूप से कटने से बचाया है। अब सिर्फ 110 पेड़ ही कटेंगे।

मेट्रो कंपनी ने बेवजह काट दिए थे 40 से ज्यादा पेड़

मेट्रो प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाष नगर से एम्स रूट पर मेट्रो कंपनी ने करीब 3000 पेड़ों को काटा। इनमें से लगभग 500 से ज्यादा पेड़ों को बेवजह ही काट दिया गया। साकेत नगर में एम्स अस्पताल के पास 40 पेड़ों को रातों-रात काट दिया गया था। जबकि यह पेड़ मेट्रो रूट से करीब 20 मीटर की दूरी पर एम्स की बाउंड्रीवॉल के किनारे लगे हुए थे। इन्हें सिर्फ इसलिए काट दिया गया था कि इन पेड़ों की टहनियां मेट्रो निर्माण कार्य में लगे डंपरों व अन्य बड़े वाहनों से टकराती थीं।

दायर किया गया यह हलफनामा

  • प्रोजेक्ट के लिए काटे जाएंगे 110 पेड़
  • शिफ्ट किए जाएंगे 90 पेड़
  • पहले प्लानिंग में काटे जाने थे 390 पेड़
  • बेवजह काटे जाने थे 280पेड़

पर्यावरण विद बोले-बिना प्लानिंग काटे जाते हैं पेड़

प्रोफेसर कॉलोनी में प्रस्तावित नए कलेक्ट्रेट भवन के निर्माण के लिए पुराने और हेरिटेज श्रेणी के पेड़ों की कटाई के संबंध में पहले इस परियोजना के लिए 390 वृक्षों को काटने का प्रस्ताव था, लेकिन हमारी आपत्ति के बाद हाउसिंग बोर्ड ने नई योजना पेश की, जिसमें अब केवल 110 वृक्षों को काटने का प्रस्ताव है। एनजीटी ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि हर कटे हुए वृक्ष के बदले 10 गुना वृक्षारोपण किया जाएगा। हाउसिंग बोर्ड ने अपने हलफनामे (शपथ पत्र) में कहा है कि उनके पास वृक्षों को शिफ्ट करने का पर्याप्त अनुभव है, अब देखने वाली बात यह होगी कि कितने वृक्ष शिफ्ट किए जा सकेंगे – नितिन सक्सेना, याचिकाकर्ता

एनजीटी के समक्ष हाउसिंग बोर्ड ने जो हलफनामा पेश किया है, उसमें उसने 110 पेड़ों को काटने और इसके एवज में दस गुना पेड़ लगाने की बात कही है। जबकि 90 पेड़ों की शिफ्टिंग करने का दावा किया है। प्रोजेक्ट डीपीआर की बात करें, तो पहले प्रोफेसर कॉलोनी में 390 पेड़ों को काटने की तैयारी थी। याचिका के बाद इनकी की संख्या में कमी आई है। जाहिर है कि प्रोजेक्ट डीपीआर बनाते वक्त असेसमेंट नहीं किया गया कि वाकई कितने पेड़ काटे जाने हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रैपेजियम मामले में साफ कहा था कि किसी भी निर्माण एजेंसियां मनमर्जी से पेड़ों को काट नहीं सकतीं। – हरप्रीत सिंह गुप्ता, एडवोकेट, भोपाल सिटीजन फोरम

राजधानी में एक दशक से ज्यादा वक्त से विकास के नाम पर हरियाली को निशाना बनाया जा रहा है। अब तक जो भी बड़े निर्माण हुए उनमें जरूरत और बेजरूरत पेड़ काटे गए। यही प्रोफेसर कॉलोनी में प्रस्तावित कलेक्ट्रेट भवन प्रोजेक्ट को लेकर हो रहा था। एक साल पहले मेट्रो कंपनी ने साकेत नगर में 40 पेड़ों को बिना अनुमति और बेवजह काट दिया था। उनसे कोई परेशानी भी नहीं थी। बावजूद ऐसा किया जाना गलत है। हमारी सरकार से मांग है कि विकास के साथ हरियाली का विनाश न हो। हरियाली को बचाकर ही विकास होना चाहिए। -उमाशंकर तिवारी, एन्वायरनमेंट एक्टिविस्ट

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