
भारत में दशहरे का त्योहार हर साल बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सांस्कृतिक परंपराओं और मेलों के आयोजन के लिए भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को दशहरा मनाया जाता है। इस बार पूरे देश में 12 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाया जाएगा। देश के कुछ स्थानों पर दशहरे के अवसर पर विशेष मेले लगते हैं, जो न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में ही प्रसिद्ध हैं। आइए जानते हैं देश के 5 ऐसे दशहरा मेलों के बारे में, जो अपनी विशिष्टता और भव्यता के लिए काफी मशहूर हैं।
बस्तर का दशहरा
विजयदशमी यानी दशहरे के दिन ही भगवान राम ने अहंकारी रावण का वध कर के माता सीता को उसके चंगुल से छुड़ाया था। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले का दशहरा अनोखा और विशेष है। बस्तर के दण्डकरण्य में भगवान राम अपने चौदह वर्षों के वनवास के दौरान रहे थे। यहां वन क्षेत्रों के हजारों आदिवासी और स्थानीय लोग पिछले 600 वर्षों से इस त्योहार को मना रहे हैं। खास बात यह है कि बस्तर में रावण दहन नहीं किया जाता। यहां रथ यात्रा का आयोजन होता है, जिसे राजा पुरुषोत्तम ने शुरू किया था। बस्तर के दशहरे में स्थानीय आदिवासी अपनी सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं का प्रदर्शन करते हैं।
मैसूर का दशहरा
कर्नाटक के मैसूर में दशहरे का मेला पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां पर दशहरा मेला देखने के लिए पूरी दुनिया से लोग आते हैं। 1610 में शुरू हुआ यह मेला लाखों लोगों को आकर्षित करता है। दशहरे के दौरान मैसूर महल को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और यहां शाही शोभायात्रा का आयोजन होता है। मैसूर का नाम महिषासुर के नाम पर रखा गया था। बता दें, यहां दशहरा का मेला नवरात्रि से ही शुरू हो जाता है।
मदिकेरी का दशहरा
कर्नाटक के मदिकेरी शहर में दशहरे का आयोजन बेहद खास तरीके से होता है। यहां के चार प्रमुख मंदिरों में दस दिनों तक यह उत्सव मनाया जाता है। मान्यता है कि इस उत्सव की शुरुआत तब हुई थी जब मदिकेरी के राजा ने देवी मरियम्मा को प्रसन्न करने के लिए इसे आरंभ किया था। आज भी यहां परंपरागत तरीके से इस उत्सव को मनाया जाता है। इसकी तैयारियां तीन महीने पहले से ही शुरू कर दी जाती हैं।
कुल्लू का दशहरा
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में मनाया जाने वाला दशहरा एक अंतरराष्ट्रीय त्योहार के रूप में प्रसिद्ध है। यहां यह उत्सव 17वीं शताब्दी से मनाया जा रहा है। खास बात यह है कि यहां विभिन्न देवताओं की मूर्तियों को सिर पर रखकर लोग भगवान राम से मिलने के लिए जाते हैं। यह मेला 7 दिनों तक चलता है और हजारों लोग इसमें हिस्सा लेते हैं। हिमाचल के कुल्लू में दशहरे को अंतरराष्ट्रीय त्योहार घोषित किया गया है।
कोटा का दशहरा मेला
राजस्थान के कोटा शहर में दशहरे का मेला 25 दिनों तक चलता है। इस मेले की शुरुआत महाराज भीमसिंह द्वितीय ने 125 वर्ष पूर्व की थी, जिसे कोटावासियों ने आज तक कायम रखा है। मेले में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले जलाए जाते हैं, साथ ही भजन-कीर्तन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। कोटा का दशहरा मेला अपने भव्यता और लम्बी अवधि के लिए जाना जाता है।
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