
नरेंद्र सिंह-जबलपुर। कटोरेनुमा संरचना, मां नर्मदा की समृद्ध जल विरासत और हरियाली की वजह से जबलपुर का तापमान कभी 46 डिग्री के पार नहीं होता। सुनने में भले ही यह अजीब लगे, मगर शहर के पर्यावरणविदों का यही कहना है। मौसम के रिकॉर्ड में भी शहर का अधिकतम तापमान 46 डिग्री के पार नहीं बताया गया। सिर्फ एक बार 2019 में 45 सालों के इतिहास में पारा 46.8 तक गया था। शहर की श्वांस नलिका कही जाने वाली मदन महल पहाड़ी पर प्रशासन द्वारा बीते 6 सालों में जिस तरह पौधरोपण पर फोकस किया गया, उसके परिणाम सार्थक रहे हैं।
यहां हाईकोर्ट के आदेश के बाद करीब साढ़े 3 हजार मकान हटाए गए थे। यहां की 54 एकड़ पहाड़ी पर 44 हजार पौधे लगाए गए, जो अब पेड़ बन चुके हैं। इसी तरह डुमना नेचर पार्क में मियावाकी पद्धति से लगाए गए 15 हजार पौधे तो 25-25 फीट लंबे पेड़ बन चुके हैं। इसी प्रकार मदनमहल-कछपुरा रोड पर नाला किनारे बने सैकड़ा भर से ज्यादा मकान हटवाकर 13 हजार पौधे रोपे गए थे।
1.80 लाख पौधे बन रहे पेड़,5 लाख की जरूरत और
शहर में पिछले दशक में 1.80 लाख पौधे रोपे गए हैं, जिनमें से आधे तो पेड़ बन चुके हैं। यहां कम से कम 5 लाख पेड़ और तैयार हों, इसकी जरूरत है। इसके लिए शहर के चौराहों की रोटरी, फ्लाई ओवर्स के आसपास या जहां भी जगह मिले, वहां बड़ी प्रजाति के पेड़ लगाए जाएं तो आने वाले दशक में शहर की तस्वीर ही कुछ और हो सकती है। इसके अलावा मियावाकी पद्धति से पौधरोपण करने से हरियाली भी बढ़ेगी।
नौतपा में तपे ये आसपास के शहर
गौरतलब है कि जबलपुर के आसपास के शहरों में नौतपा में कुछ शहर ऐसे रहे, जहां पारा 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा है। इसमें दमोह, रीवा, उमरिया, सतना जैसे जिले शामिल हैं, मगर जबलपुर में यह 44.5 डिग्री तक ही पहुंचा। इनमें दमोह जबलपुर से महज 100 किलोमीटर है, मगर यह पथरीला मैदानी इलाका होने से खूब तपा।
नर्मदा की समृद्ध जल विरासत, कटोरेनुमा संरचना तथा हरियाली के प्रति लोगों में आई जागरुकता की वजह से जबलपुर में अन्य शहरों की तुलना में पारा नियंत्रित रहता है। शहर के चारों ओर हरियाली से युक्त पहाड़ियां इसे सुरक्षित रखती हैं। -डॉ.प्रो. आरके श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान, साइंस कॉलेज, जबलपुर
पिछले 45 साल में केवल 2019 में अधिकतम तापमान 46.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था। वहीं इस अवधि में चार बार पारा 46 डिग्री तक पहुंचा है। आमतौर पर इसके नीचे ही तापमान होता है। इसकी वजह शहर की भौगोलिक स्थिति हो सकता है। -देवेन्द्र कुमार तिवारी,सहा.वैज्ञानिक, प्रभारी मौसम विभाग,जबलपुर