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आर्थिक सुधारों के नायक डॉ. मनमोहन सिंह नहीं रहे

पूर्व प्रधानमंत्री का 92 वर्ष की उम्र में निधनदेश में रहेगा 7 दिन का राष्ट्रीय शोक
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आर्थिक सुधारों के नायक डॉ. मनमोहन सिंह नहीं रहे

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार रात राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे। डॉक्टर सिंह को सांस लेने में तकलीफ के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एम्स ने एक विज्ञप्ति में बताया कि डॉक्टर सिंह को आठ बजकर पांच मिनट पर अस्पताल लाया गया और उन्हें तुरंत चिकित्सा प्रदान की गई। डॉक्टरों के अथक प्रयास के बावजूद डॉ. सिंह का नौ बजकर 51 मिनट पर निधन हो गया। केंद्र सरकार ने 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। डॉ. सिंह वर्ष 2004 से वर्ष 2014 तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार में प्रधानमंत्री रहे। इससे पहले वह वित्त मंत्री, वित्त सचिव और रिजर्व बैंक के गवर्नर भी रहे। नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान अर्थव्यवस्था के उदारीकरण में उनकी केंद्रीय भूमिका मानी जाती है। उन्होंने 1991-96 के दौरान पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली सरकार में वित्त मंत्री के रूप में भी काम किया है, जब देश में व्यापक आर्थिक सुधार हुए थे। उन्हें नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण सुधारों के प्रमुख वास्तुकार के रूप में श्रेय दिया जाता है। देश के चौदहवें प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह अपनी नम्रता, कर्मठता और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं।

कांग्रेस ने अपने सभी कार्यक्रम सात दिन के लिए रद्द किए

कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सम्मान में अपने सभी आधिकारिक कार्यक्रमों को सात दिन के लिए रद्द कर दिया है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक्स पर लिखा कि ‘दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंहजी के सम्मान में, स्थापना दिवस समारोह सहित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी आधिकारिक कार्यक्रम अगले सात दिन के लिए रद्द कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसमें सभी आंदोलनात्मक और संपर्क कार्यक्रम शामिल हैं।

डॉ. मनमोहन सिंह के कुछ खास बयान

  • हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रखी।
  • मेरे दस साल का कार्यकाल इतिहासकारों के मूल्यांकन का विषय है।
  • हो सकता है कि हमने कुछ गलत किया हो... लेकिन हमने बहुत अच्छे काम भी किए हैं।
  • पैसे पेड़ पर नहीं उगते।

अविभाजित हिंदुस्तान में जन्म

डॉ. सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के झेलम जिले के गाह गांव में हुआ था। उनकी मां अमृत कौर और पिता गुरमुख सिंह थे। उनके पिता एक कंपनी में क्लर्क थे। डॉ. सिंह ने वर्ष 1948 में पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक की शिक्षा पूरी की। बाद में उन्होंने ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1957 में उन्होंने अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी से आॅनर्स की डिग्री अर्जित की। इसके बाद वर्ष 1962 में उन्होंने आॅक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नूफिल्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में डी.फिल किया। डॉ. सिंह और उनकी पत्नी गुरशरण कौर की तीन बेटियां हैं।

शिक्षा से लेकर प्रधानमंत्री तक का सफर

  • 1954 : पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की।
  • 1957: कैम्ब्रिज विवि से इकॉनॉमिक्स ट्रिपोस।
  • 1962: आॅक्सफोर्ड विवि से अर्थशास्त्र में डी.फिल।
  • 1971: वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में भारत सरकार में शामिल हुए।
  • 1972: वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार।
  • 1980-82: योजना आयोग के सदस्य।
  • 1982-1985 : भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर।
  • 1985-87: योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे।
  • 1987-90 : जिनेवा में दक्षिण आयोग के महासचिव।
  • 1990: आर्थिक मामलों पर पीएम के सलाहकार।
  • 1991: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष।
  • 1991-96: नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री।
  • 1991: असम से राज्यसभा के लिए चुने गए।
  • 1995, 2001, 2007 और 2013 में फिर से राज्यसभा सदस्य चुने गए।
  • 1998-2004: राज्यसभा में विपक्ष के नेता।
  • 2004-2014: भारत के प्रधानमंत्री।

    पूर्व प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंहजी उन दुर्लभ राजनेताओं में से एक थे, जिन्होंने शिक्षा और प्रशासन की दुनिया में भी समान सहजता से काम किया। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा, उनके बेदाग राजनीतिक जीवन और उनकी अत्यंत विनम्रता के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनका निधन हम सभी के लिए बहुत बड़ी क्षति है। मैं भारत के सबसे महान सपूतों में से एक को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। -द्रौपदी मुर्मु, राष्ट्रपति

    भारत अपने सबसे प्रतिष्ठित नेताओं में से एक डॉ. मनमोहन सिंहजी के निधन पर शोक मना रहा है। साधारण परिवार से उठकर वह एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री बने। उन्होंने वित्त मंत्री सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया और वर्षों तक हमारी आर्थिक नीति पर एक मजबूत छाप छोड़ी। जब वह प्रधानमंत्री थे और मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, डॉ. मनमोहन सिंह और मैं नियमित रूप से बातचीत करते थे। हम शासन से संबंधित विभिन्न विषयों पर गहन विचार-विमर्श करते थे। -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

    मनमोहन सिंहजी ने असीम बुद्धिमत्ता और निष्ठा के साथ भारत का नेतृत्व किया। उनकी विनम्रता और अर्थशास्त्र की गहरी समझ ने देश को प्रेरित किया। मैंने एक गुरु और मार्गदर्शक खो दिया है। हममें से लाखों लोग जो उनके प्रशंसक थे, उन्हें अत्यंत गर्व के साथ याद करेंगे। -राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा

    डॉ. मनमोहन सिंहजी का निधन राजनीतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत की पुण्यात्मा को शांति प्रदान करें। आरबीआई के गवर्नर, देश के वित्त मंत्री एवं प्रधानमंत्री जैसे दायित्व को निभाते हुए उन्होंने अपनी कुशल और दूरदर्शी नीतियों से देश की आर्थिक समृद्धि के प्रयासों में सहभागिता की और विभिन्न चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया। -डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मप्र

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