
इंदौर। कलेक्टर जनसुनवाई में एक बुजुर्ग व्यक्ति अपने आप को जीवित साबित करने के लिए पहुंचा। युवती का कहना है कि, जमीनी विवाद के चलते 2006 में सरकारी कागजों में उसके दादाजी को मृत घोषित कर दिया गया था। जिसके चलते वह अपने दादाजी और पिता के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंची और सरकारी अधिकारियों द्वारा इस गलत कागज बनाए जाने की शिकायत की। वहीं कलेक्टर ने एसडीएम को मामले की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
क्यों किया गया मृत घोषित
फरियादी नेहा योगी ने कहा कि, वर्ष 2006 में उनके दादाजी को सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया गया था। इंदौर के पास सांवेर थाना क्षेत्र के पोटलोद गांव में उनकी पुश्तैनी जमीन है। उसी जमीन के विवाद के चलते ऐसा किया गया। नेहा ने आगे बताया कि, जमीनी विवाद के चलते पूरा मामला न्यायालय के समक्ष चला जिसके बाद 2018 में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए उनके हक में फैसला दिया। लेकिन नेहा के परिवार का जिनसे जमीनी विवाद चल रहा था उन्होंने पूरे फैसले पर स्टे ले लिया। जिसके बाद जमीनी मामला एक बार फिर उलझ गया। परिवार को बंटवारे में 5 बीघा जमीन मिलना था लेकिन वह भी हक नहीं मिला।
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— Peoples Samachar (@psamachar1) April 12, 2023
सरकारी अधिकारी देते हैं ऐसे जवाब
जनसुनवाई में पहुंची नेहा ने बताया कि, तहसीलदार नायब तहसीलदार कई अलग-अलग तरह की बातें करते हैं और इस तरह से जवाब देते हैं कि आम व्यक्ति उससे हतोत्साहित हो जाए। कई अधिकारियों ने कहा कि, जब आंख में दर्द है तो पेट के डॉक्टर को क्यों दिखाते हो।