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कोविड के बाद 6 गुना पहुंच गई बांस के मुरब्बे की डिमांड

जबलपुर के बांस के मुरब्बे की मांग मप्र के साथ कई राज्यों में, हर दिन हो रही 120 किलो तक खपत

हर्षित चौरसिया-जबलपुर। छत को ढंकने और घर के साजो सामान बनाने के काम में आने वाला बांस अब लोगों की सेहत को दुरुस्त कर रहा है। कोविड-19 महामारी के बाद बांस के मुरब्बे की डिमांड 5 गुना तक बढ़ गई है। बांस के मुरब्बे की सबसे ज्यादा खपत कोलेस्ट्राल और कैल्शियम की कमी से पीड़ित मरीजों में है। जबलपुर के बांस के मुरब्बे की डिमांड मप्र के साथ 5 राज्यों में है।

20 किलो प्रतिदिन की खपत बढ़कर पहुंची 120 किलो तक

बांस का मुरब्बा तैयार करने वाले व्यवसायी अतुल बनारसी ने बताया कि कोविड के पहले बांस के मुरब्बे की खपत प्रतिदिन 20 किलो थी। अब यह खपत बढ़कर 120 किलो प्रतिदिन तक पहुंच गई है। इस मुरब्बे की मांग प्रदेश के कुछ जिलों के साथ देश के दूसरे राज्यों में भी है।

इन जगहों पर है मांग : बांस के मुरब्बे की मांग पुणे, बेंगलुरु, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल के साथ दक्षिण भारत के कुछ शहरों में है।

ऐसे करें पहचान

बाजार में गन्ने के मुरब्बे को बांस का मुरब्बा बताकर भी बेचा जा रहा है। बांस के मुरब्बे की सबसे बड़ी पहचान है कि उसके रेशे खाते ही मुंह में घुल जाते हैं। गन्ने में यह नहीं होता।

इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर : जिला अस्पताल की आहार विशेषज्ञ अनिता साहू ने बताया कि बांस के मुरब्बे में विटामिन ए, ई, बी 6, कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम, कॉपर, जिंक जैसे कई पोषक तत्व की मात्रा अच्छी होती है। इसके पोषक तत्व, इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, फेफड़ों के लिए फायदेमंद होते हैं।

बांस के मुरब्बे में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं। इसमें मौजूद फाइबर, पेट की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। बुजुर्गों में होने वाली आर्थेराइट्स की समस्या, हृदयरोग, बढ़ती उम्र के बच्चों में अनिद्रा और हार्मोनल इम्बैलेंस को ठीक करता है। – डॉ. सुमित श्रीवास्तव, आयुर्वेदाचार्य

बांस में एंटीऑक्सीडेंट, कैल्शियम की मात्रा ज्यादा होती है। बढ़ती उम्र के बच्चों के लिए बांस का मुरब्बा लाभकारी है। इसका सेवन चिकित्सकीय परामर्श पर किया जाना चाहिए। – डॉ. विजय आनंद मरावी, शिशु रोग विशेषज्ञ

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