
नई दिल्ली। शराब घोटाले में पूछताछ के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को भी ED के सामने पेश नहीं होंगे। दिल्ली के कथित शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छठी बार समन जारी कर 19 फरवरी को पेश होने के लिए कहा था। AAP ने ईडी के समन को गैर कानूनी बताया है। आप ने कहा कि ED के समन की वैधता का मामला अब कोर्ट में है। समन को लेकर एजेंसी खुद कोर्ट गई हुई है। ईडी को बार-बार समन भेजने के बजाय कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए।
ईडी ने कब-कब भेजे समन?
कब भेजा | समन | पेश हुए या नहीं |
2 नवंबर | पहला समन | पेश नहीं हुए |
21 दिसंबर | दूसरा समन | पेश नहीं हुए |
3 जनवरी | तीसरा समन | पेश नहीं हुए |
17 जनवरी | चौथा समन | पेश नहीं हुए |
2 फरवरी | पांचवां समन | पेश नहीं हुए |
14 फरवरी (19 फरवरी को बुलाया) | छठवां समन | पेश नहीं हुए |
कोर्ट पहुंची जांच एजेंसी
शराब घोटाला मामले में ईडी द्वारा बार-बार समन जारी करने के बाद भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पेश नहीं हो रहे थे। इसके बाद जांच एजेंसी कोर्ट पहुंची थी। कोर्ट ने 17 फरवरी को केजरीवाल को पेश होने को कहा था। केजरीवाल शनिवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई से जुड़े। अरविंद केजरीवाल के वकील ने पेशी से छूट के लिए ऐप्लिकेशन लगाई है। वकील ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली सरकार के बजट और विश्वास प्रस्ताव की वजह से वह पेश नहीं हो पा रहे हैं। केजरीवाल शराब नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जारी पिछले पांच समन के बावजूद पेश नहीं होने पर स्पष्टीकरण देने के लिए राउज एवेन्यू कोर्ट के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए थे।
केजरीवाल ने क्या कहा कोर्ट से?
केजरीवाल ने कोर्ट से कहा कि, मैं आना चाहता था, लेकिन बजट और विश्वास प्रस्ताव की वजह से नहीं आ सका। जो 1 मार्च तक चलेगा। अगली तारीख पर आ जाऊंगा। हालांकि, ईडी ने इसका विरोध नहीं किया है। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च तय की है। अरविंद केजरीवाल का दूसरा इम्तिहान दिल्ली विधानसभा में है। जहां आज विश्वासमत पर चर्चा होगी।
CBI कर चुकी है पूछताछ
CBI ने अप्रैल 2022 में CM केजरीवाल से शराब नीति केस में अपने ऑफिस में करीब साढ़े 9 घंटे तक पूछताछ की थी। केजरीवाल सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर और फिर रात 8:30 बजे बाहर आए। इस दौरान उनसे करीब 56 सवाल पूछे गए।
केजरीवाल ने कहा था- CBI के सभी सवालों के मैंने जवाब दिए, AAP कट्टर ईमानदार पार्टी है। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, हम कभी अपनी ईमानदारी के साथ समझौता नहीं करेंगे। वे AAP को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन देश की जनता हमारे साथ है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली में केजरीवाल की सरकार में डिप्टी सीएम रहे मनीष सिसोदिया ने 22 मार्च 2021 को नई शराब नीति का ऐलान किया था। 17 नवंबर 2021 को नई शराब नीति यानी एक्साइज पॉलिसी 2021-22 लागू कर दी गई। नई शराब नीति लागू करने के बाद सरकार शराब के कारोबार से बाहर आ गई और शराब की पूरी दुकानें निजी हाथों में चली गई। नई नीति लाने के पीछे सरकार का तर्क था कि इससे माफिया राज खत्म होगा और सरकार का रेवेन्यू में बढ़ेगा। नई नीति से रेवेन्यू में 1500-2000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई थी।
नई पॉलिसी में कहा गया था कि दिल्ली में शराब की कुल दुकानें पहले की तरह 850 ही रहेंगी। हालांकि, नई नीति शुरू से ही विवादों में रही। जब बवाल ज्यादा बढ़ गया, तब 28 जुलाई 2022 को सरकार ने नई शराब नीति रद्द कर फिर पुरानी पॉलिसी लागू कर दी। मामले में सीबीआई को जांच ट्रांसफर दी गई। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा एंगल आने पर इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री हो गई। उसके बाद से AAP के कई सीनियर नेता और उनके करीबी सहयोगी जांच एजेंसी के निशाने पर आ गए।
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