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पुरुष प्रताड़ना का नया हथियार बना सोशल मीडिया पर बदनाम करना

पुरुष हेल्पलाइन पर पहुंच रहीं शिकायतें, प्रदेश में इंदौर-भोपाल से सबसे ज्यादा कॉल

पल्लवी वाघेला-भोपाल। प्रदेश में पुरुष भी प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं। सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के जरिए पुरुषों को बदनाम और ब्लैकमेल करना इसमें नए तरीके के रूप में सामने आ रहा है। झूठे केस, बच्चों से दूरी, घरेलू हिंसा जैसी प्रताड़ना भी पुरुष झेलते हैं। वहीं, कई पुरुषों ने हेल्पलाइन पर कार्यस्थल प्रताड़ना की बात भी स्वीकारी।

साल 2024 में पुरुष हेल्पलाइन नंबर और डालसा में मप्र के 15,170 पुरुषों ने प्रताड़ना की शिकायत करते हुए मदद मांगी। इनमें 7,059 मामले सोशल मीडिया से जुड़े हैं। बता दें, भाई वेलफेयर सोसाइटी के अनुसार मदद मांगने वाले पुरुषों की संख्या के आधार पर प्रदेश में इंदौर से पुरुषों ने सबसे ज्यादा कॉल किए। इसके बाद भोपाल, ग्वालियर, बैतूल, सतना और जबलपुर आते हैं।

फैक्ट फाइल

  • मदद मांगने में मप्र- छग तीसरे नंबर पर। पहले नंबर पर दिल्ली-राजस्थान- हरियाणा और जम्मू-कश्मीर सर्कल और दूसरे नंबर पर यूपी बिहार-झारखंड।
  • नॉर्थ ईस्ट, केरला,तमिलनाडु और प. बंगाल के पुरुषों की स्थिति बेहतर।

केस 1

कोलार निवासी दो बच्चों के आईटी प्रोफेशनल पिता के तलाक से मना करने पर पत्नी ने उसे धोखे से नींद की गोली दी। फिर पत्नी ने पति की न्यूड क्लिप सोशल मीडिया पर डाल उसे शराबी और नपुंसक साबित करने की कोशिश की।

केस 2

पति के खिलाफ अपना केस मजबूत बनाने पत्नी ने खरगोन में पदस्थ ऑफिसर पति और प्रशासनिक सेवा से रिटायर्ड सास-ससुर के खिलाफ, मारपीट के झूठे निशान दिखाते हुए पोस्ट शेयर कर दी।

झूठे केस

हेल्पलाइन के आंकड़े बताते हैं कि मामूली विवाद में भी महिलाएं पति पर दबाव बनाने दहेज प्रताड़ना का केस लगा देती हैं। पत्नी व परिचित महिलाओं द्वारा बदला लेने के लिए सोशल मीडिया पर झूठे शिकायती वीडियो शेयर करने के केस बढ़ रहे हैं।

नहीं बोल पाते

भारत में पुरुषों पर हिंसा का कोई सरकारी सर्वे नहीं है। माई नेशन और सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन की स्टडी के मुताबिक भारत में 82% पति 3साल में एक बार घरेलू हिंसा का सामना करते हैं, पर बोलते नहीं।

हरसंभव मदद करते हैं

महिला हित में बने कानून का दुरुपयोग होने के कारण पुरुष शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेल रहे हैं। सामाजिक बदनामी भी वह झेल नहीं पाते। इसीलिए अवसाद में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। हेल्पलाइन पर उन्हें कानूनी सहायता के साथ ही मानसिक संबल भी देते हैं। – जकी अहमद, पुरुषों की हितों के लिए काम करने वाली भाई संस्था के समन्वयक

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