
राजीव सोनी-भोपाल। अयोध्या के राम मंदिर में भगवान रामलला के दर्शनों के लिए उमड़ रहे लाखों श्रद्धालुओं से वीआईपी दर्शन के नाम पर कोई शुल्क वसूली नहीं होगी। मंदिर ट्रस्ट की ओर से सभी भक्तों को नि:शुल्क प्रसादी वितरण यथावत चल रहा है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब तक करीब साढ़े सात महीने में ही यहां देश भर के 2.25 करोड़ से अधिक दर्शनार्थी आ चुके हैं।
हर दिन औसतन 70 हजार से अधिक लोग सहजता से रामलला के दर्शन कर रहे हैं, जबकि मंदिर समिति ने रोज 4 लाख लोगों को दर्शन कराने की व्यवस्थाएं की हैं। विश्व हिंदू परिषद के सहयोगी संगठन ‘वनवासी रक्षा परिवार फाउंडेशन’ की अयोध्या में संपन्न अखिल भारतीय बैठक में मंदिर समिति के पदाधिकारी की ओर से यह जानकारी दी गई। बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय के सहयोगी गोपाल जी व 250 अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
400 करोड़ जीएसटी दिया
विश्वहिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने एक्स पर कहा है कि राम मंदिर निर्माण में प्रयुक्त सामग्री से सरकार को 400 करोड़ रुपए जीएसटी मिलेगा। उन्होंने पूछा कि क्या किसी मस्जिद, मदरसे, चर्च से सरकार को इतनी आय हुई?
खारिज किया प्रस्ताव
बैठक में इस बात का भी जिक्र हुआ कि देश के अन्य प्रमुख मंदिरों में चल रही सशुल्क विशेष दर्शन व्यवस्था जैसा सुझाव यहां भी आया था, लेकिन प्रबंधन द्वारा इसे सिरे से खारिज कर दिया गया। मंदिर ट्रस्ट ने वृद्ध और अशक्त भक्तों को व्हील चेयर से रामलला के सुलभ दर्शन कराने की व्यवस्था की है। यह भी तर्क दिया गया कि हिंदू समाज ने जिस मंदिर निर्माण के लिए उदारता के साथ निधि समर्पित की है भविष्य में भी उसकी व्यवस्था संचालन में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
राम दरबार का निर्माण
मंदिर के भू-तल पर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर परिसर में शेष निर्माण कार्य अब भी जारी है। हालांकि निर्माण की गति पहले जैसी तूफानी नहीं रही। यहां राम कथा मंदिर के साथ प्रथम तल पर राम दरबार की स्थापना होना बाकी है। राम दरबार में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमानजी विराजमान किए जाएंगे। मंदिर के दूसरे फ्लोर पर भगवान राम के जीवन और उनकी लीलाओं से जुड़ी कथाओं का वर्णन देश की प्रमुख भाषाओं में होगा।