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परिवहन विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप : क्या गोविंद सिंह राजपूत के परिवहन मंत्री बनते ही शुरू हुई सौरभ शर्मा की बल्ले-बल्ले !

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परिवहन विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप : क्या गोविंद सिंह राजपूत के परिवहन मंत्री बनते ही शुरू हुई सौरभ शर्मा की बल्ले-बल्ले !
भोपाल। मध्यप्रदेश के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्तियों का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने आयकर और लोकायुक्त विभाग के बड़े अधिकारियों के दांत भी खट्टे कर दिए हैं। इस मामले में परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा का नाम आया है, वो करोड़ों की संपत्तियों और रसूखदार नेताओं व अधिकारियों से गठजोड़ के लिए चर्चा में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग की छापेमारी ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को और सनसनीखेज बना दिया है। बता दें, सौरभ शर्मा को 2016 में अनुकंपा नियुक्ति के आधार पर नौकरी मिली थी।

आरक्षक से करोड़पति बनने का सफर

2016 में अनुकंपा नियुक्ति के तहत आरक्षक बने सौरभ शर्मा ने ग्वालियर स्थित परिवहन आयुक्त कार्यालय में शुरुआत की। कुछ ही समय में उसने चेकपोस्ट पर पोस्टिंग करा ली और भ्रष्टाचार का नेटवर्क खड़ा करना शुरू कर दिया। 2019 में भोपाल स्थानांतरित होने के बाद सौरभ ने तत्कालीन परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के साथ नजदीकी बढ़ाई। इस दौरान चेकपोस्टों पर अवैध वसूली के कई आरोप लगे। शिकायतों के बावजूद सौरभ का नेटवर्क मजबूत होता गया। चेकपोस्टों पर अवैध वसूली का सिलसिला यूं था कि, उस समय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी नागपुर के भाजपा नेताओं की शिकायत के आधार पर तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को अवैध वसूली के संबंध में पत्र लिखा था। इस वसूली में सौरभ शर्मा एक मुख्य कड़ी था। इस हाईप्रोफाइल केस में बड़े पैमाने पर कैश और बहुमूल्य वस्तुओं की बरामदगी के बाद अब राजनीतिक गलियारों में सौरभ से मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की नजदीकी की चर्चा चल रही है। कुछ दिन पहले सौरभ शर्मा पर किए गए सवाल को लेकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत मीडियाकर्मियों पर बिफर गए थे।

ईडी और आयकर विभाग की कार्रवाई में खुलासे

19 दिसंबर को सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी में 8 करोड़ रुपए नकद और 235 किलो चांदी की बरामदी की गई थी। इसके अलावा, भोपाल के मेंडोरी इलाके में लावारिस कार से 11 करोड़ रुपए कैश और 40 करोड़ रुपए कीमत का सोना मिला। जिस कार में यह बरामदगी की गई, वो सौरभ शर्मा के करीबी चेतन सिंह गौर की थी। इस पर आरटीओ लिखा नंबर प्लेट भी लगा हुआ था। इन खुलासों से साफ है कि सौरभ सिर्फ मोहरा था और असली खेल रसूखदार नेताओं और अधिकारियों का था। बताया जाता है परिवहन विभाग के कई आला अधिकारी और कुछ नेता लगातार सौरभ शर्मा के संपर्क में थे और अपनी काली कमाई उसी के माध्यम से ठिकाने लगा रहे थे।

सवालों के घेरे में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत

सौरभ शर्मा की रसूखदारों से नजदीकी पर सवाल उठने पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने गुस्से में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हजारों कर्मचारी काम करते हैं, किसने क्या किया, यह जांच का विषय है।

भ्रष्टाचार की शिकायतों के बीच कैसे मिला वीआरएस

सौरभ शर्मा ने 2023 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ली, जो अब संदेह के घेरे में है। आरोप है कि भ्रष्टाचार की शिकायतों के बावजूद उसे वीआरएस क्यों और कैसे दिया गया। सूत्र बताते हैं कि वीआरएस के बाद भी सौरभ परिवहन मंत्री और आयुक्त के लिए काम करता रहा और विभाग के काले धन का लेन-देन संभालता रहा। बताया जाता है परिवहन विभाग में पदस्थ रहते हुए, सौरभ शर्मा के खिलाफ शिकायत की गई थी। ऐसे में उसने वीआरएस ले लिया था ताकि वह जांच एजेंसियों से बच सकें। मध्यप्रदेश सरकार ने इस मामले में गहराई से जांच के आदेश दिए हैं। इंटेलिजेंस एजेंसियां अब सौरभ के नेटवर्क और उससे जुड़े नेताओं व अधिकारियों की पड़ताल में जुटी हैं। ये भी पढ़ें- भोपाल : जहांगीराबाद की पुरानी गल्ला मंडी में दो पक्षों में विवाद, पथराव और तलवारें लहराईं, 6 लोग घायल; भारी पुलिस बल तैनात
Wasif Khan
By Wasif Khan

फिलहाल जुलाई 2024 से पीपुल्स अपडेट में सब-एडिटर हूं। बीते 3 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हूं। 12वीं म...Read More

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