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The Great Indian Politics : झारखंड और दिल्ली के बाद अब कर्नाटक CM की कुर्सी खतरे में, क्या सिद्धारमैया के भी बन रहे ‘जेल यात्रा के योग’

नई दिल्ली। झारखंड और दिल्ली के बाद अब कर्नाटक में सियासी सरगर्मी बढ़ने के आसार हैं। पिछले एक महीने से उठ रहे मुडा स्कैम (MUDA scam) को लेकर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी दे दी है। मुडा स्कैम की मुख्य आरोपी मुख्यमंत्री की पत्नी बीएम पार्वती हैं। आरोप है कि उन्होंने मैसूर में गलत तरीके से जमीन ली थी।

गौर करने की बात है कि घोटाले को लेकर जब-जब किसी राज्य के राज्यपाल ने राज्य के मुख्यमंत्री पर केस चलाने की अनुमति दी है, तब-तब मुख्यमंत्री का गिरफ्तार होना तय पाया गया है। हाल फिलहाल से लेकर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तक यह सिलसिला चलता रहा है। आइए जानते हैं किन राज्यों में कब-कब ऐसा हुआ है..!

लालू यादव को छोड़नी पड़ी थी मुख्यमंत्री की कुर्सी

बिहार में लालू यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए उन पर चारा घोटाले का आरोप लगा था। विपक्ष के लामबंद विरोध प्रदर्शन से मामला हाईकोर्ट पहुंचा। जब मामला अधिक बढ़ा, तब उस समय बिहार के राज्यपाल रहे एआर किदवई ने लालू के खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत दी थी। सीबीआई ने केस हाथ में लेते हुए मामले की जांच शुरू की और कुछ ही बाद उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। जिसके बाद उनकी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया गया।

बीएस येदियुरप्पा भी जा चुके हैं जेल

इसी सिलसिले में 2011 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। उन पर अनैतिक तरीके से जमीन बंटवारे का आरोप था। उस समय संतोष हेगड़े की नेतृत्व वाली लोकायुक्त टीम मामले की जांच कर रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उस वक्त कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी। येदियुरप्पा के खिलाफ लोकायुक्त कोर्ट द्वारा अरेस्ट वारंट जारी करने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ने के साथ ही उन्हें 23 दिन जेल में रहना पड़ा।

LG की मंजूरी से हिली दिल्ली सरकार

केजरीवाल सरकार की शराब नीति में हुई गड़बड़ी के आरोपों को लेकर 2022 में दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई जांच के बाद अक्टूबर 2022 में पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया। आगे चलकर ईडी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी आरोपी पाया, जिसके बाद मार्च 2024 में लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने मुख्यमंत्री अरविंद को भी गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल, सिसोदिया जमानत पर बाहर हैं, जबकि केजरीवाल अभी भी जेल में हैं।

जयललिता भी हुईं थी शिकार

तांसी जमीन घोटाले को लेकर 1995 में उस वक्त की मुख्यमंत्री जयललिता पर आरोप लगे थे। तब वरिष्ठ वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने उन्हें आड़े हाथ लिया। स्वामी ने जांच के आदेश को लेकर तत्कालीन राज्यपाल ए चन्ना रेड्डी को पत्र लिख सिफारिश की। राज्यपाल की मंजूरी के बाद केस की जांच शुरू की गई। हालांकि इस केस में वो गिरफ्तार तो नहीं हुईं, लेकिन बाद में उन पर आय से अधिक संपत्ति के केस में गिरफ्तार किया गया।

हेमंत सोरेन को हुई जेल

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर 8.86 एकड़ जमीन को अवैध रूप से हासिल करने का आरोप लगा था, जिसकी बाजार मूल्य 31 करोड़ रुपए आंकी गई। इसको लेकर विपक्ष ने आलोचना शुरू की। मामला बढ़ता देख हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। 31 जनवरी को कथित भूमि घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था।

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