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कोरोना का फेफड़ों-दिमाग पर असर, 56% थकान, 40% एंजाइटी से पीड़ित

गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल की रिसर्च में हुआ खुलासा

प्रवीण श्रीवास्तव/भोपाल। कोरोना की लहर खत्म हुए दो साल हो चुके हैं, लेकिन इसका असर अब भी है। कोरोना संक्रमित लोगों को ठीक होने के साल भर बाद भी हार्ट, लंग्स, मेटाबॉलिज्म के साथ दिमाग संबंधी परेशानियां (एंजाइटी) हो रही हैं। कोरोना से उबर चुके 40 फीसदी लोग न्यूरोसाइटिक डिसआॅर्डर तो 45 फीसदी फंक्शनल परेशानियों से जूझ रहे हैं। यह खुलासा गांधी मेडिकल कॉलेज के रीजनल इंस्टीट्यूट आॅफ रेस्पिरेटरी डिसीज में चल रहे शोध के प्रारंभिक आंकड़ों से हुआ है।

65 फीसदी के फेफड़ों को अब भी नुकसान :

शोध के लिए कोरोना से ठीक हो चुके 100 मरीजों को चुना गया। इन मरीजों का लंग्स फंक्शन टेस्ट के साथ न्यूरो साइकेट्रिक टेस्ट भी किए गए। अध्ययन में पता चला कि करीब 11 फीसदी मरीजों के फेफड़ों में गंभीर समस्या है। इसी तरह 21 फीसदी को मध्यम समस्याएं और 35 फीसदी को अब भी हल्की समस्याएं हो रही हैं। 35 फीसदी मरीजों के फेफड़ों में किसी प्रकार की समस्या नहीं थी।

आंकड़ों के मुताबिक युवाओं पर असर ज्यादा

रिसर्च के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना के बाद युवाओं पर सबसे ज्यादा असर दिखा। इनमें 32 फीसदी मरीजों की उम्र 20 से 30 वर्ष, 28 फीसदी की उम्र 41 से 50, 25 फीसदी की उम्र 31 से 40 और 15 फीसदी 51 से ज्यादा उम्र के थे। जिन मरीजों को शोध में शामिल किया गया, उनमें 55 फीसदी पुरुष और 45 फीसदी महिलाएं थीं।

पोस्ट कोविड सिंड्रोम के मामले भी आ रहे

संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पराग शर्मा बताते हैं कि सामान्य तौर पर कोरोना 3 से 5 सप्ताह में ठीक हो जाता है, लेकिन यह वायरस शरीर में अपना कुछ असर छोड़ जाता है। इससे जल्दी सांस फूलना, तेज चलने पर घबराहट महसूस होना जैसे लक्षण सामान्य हैं। इसका असर कई महीनों तक रह सकता है। इसे फाइब्रोसिस कहते हैं, जो पोस्ट कोविड सिंड्रोम हो सकता है।

ग्वालियर में अब भी आ रहे लंग्स इन्फेक्शन के मरीज

कोरोना के दौरान मरीजों के लंग्स में काफी परेशानी आई थी, कोविड की दूसरी लहर के बाद भी मरीजों की परेशानी समाप्त नहीं हुई। अंचल के सबसे बड़े अस्पताल जीआरएमसी के टीबी एवं चेस्ट विभाग के विभागा अध्यक्ष डॉ. सौरभ सिंह ने बताया कि लग्स इंफेक्शन के मामले कोरोना के बाद भी नहीं थमे और हर तीन में एक मरीज लंग्स इंफेक्शन से पीड़ित आ रहा है। वहीं, जबलपुर मेडिकल कॉलेज के रेस्पेरेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय भारती ने बताया कि कोविड के साइड इफेक्ट में लंग्स में इन्फेक्शन के मरीजों में वृद्धि नहीं हुई है।

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