
भोपाल (अमिताभ बुधौलिया)। बंगाल में कानून व्यवस्था, हिंदुओं पर बढ़ रहे अत्याचार और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर केंद्रित फिल्म ‘द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल’ को लेकर बवाल मचा हुआ है। फिल्म 30 अगस्त, 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। यह फिल्म शूटिंग से लेकर रिलीज तक परेशानियों में घिरी रही है। फिल्म के लेखक-निर्देशक सनोज मिश्रा ने ममता सरकार और सेंसर बोर्ड में कथित तौर पर बैठे वामपंथियों पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। पीपुल्स अपडेट में सुनिए सनोज मिश्रा का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू…
बंगाल डायरी बनाने की वजह
अपनी आने वाली फिल्म ‘The Diary of West Bengal’ बनाने के पीछे की वजहों को लेकर सनोज मिश्रा कहते हैं- आजादी के बाद से ही बंगाल के हालात खराब रहे हैं। बंगाल में हिंसा की मौजूदा घटनाएं इसका ताजा उदाहरण हैं। आज वहां तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है। बंगाल सरकार का रवैया पूरी तरह से तानाशाही है। इसी के खिलाफ मेरी पूरी लड़ाई है। इससे पहने कश्मीर में भी ऐसे माहौल थे, लेकिन केंद्र सरकार के दखल के बाद वहां हालात सामान्य हो चुके हैं। कुछ ऐसा ही हस्तक्षेप बंगाल में भी होना चाहिए। आज बंगाल बहुत डिस्टर्ब है और अगला कश्मीर बनने की राह पर है। फिल्म के रिसर्च के लिए बंगाल जाकर प्रशासन, एक्टिविस्ट और आरटीआई के जरिए जानकारियां जुटाई गई हैं।
फिल्म को लेकर बंगाल सरकार ने किया केस
सनोज मिश्रा ने बताया कि फिल्म बनाते समय कई अड़चनों को सामना करना पड़ा। फिल्म बनने के दौरान बंगाल सरकार ने पुलिस केस कर दिया। हमारे केस की पैरवी के लिए कोई वकील तैयार नहीं हुआ, क्योंकि हर कोई ममता सरकार के दबाव में है। केस की वजह से प्रोड्यूसर मिलने मुश्किल हो गए। फंडिंग और फिल्म मेकिंग दोनों की समस्या थी, लेकिन धीरे-धीरे सब ठीक हो गया और फिल्म बनकर तैयार हो गई। रिलीज से पहले भी दो-तीन केस और दर्ज किए गए हैं। बंगाल सरकार हर हाल में फिल्म को रिलीज होने से रोकना चाहती है।
सेंसर बोर्ड ने फिल्म से कई सीन काटे
सनोज मिश्रा ने कहा-फिल्म को सेंसर बोर्ड से पास कराने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ी। जो लोग सेंसर बोर्ड के मेंबर हैं, वो पहले से ही किसी खास राजनीतिक विचारधारा और पूर्वाग्रहों से पीड़ित हैं। काटे गए सीन के पक्ष में सबूत पेश करने के बाद भी सेंसर बोर्ड ने कई सीन जानबूझ कर काट दिए। उनके ऊपर भी राजनीतिक दबाव है। सेंसर बोर्ड के इस रवैये से भी महीनों का समय बर्बाद हुआ। सामाजिक सौहार्द का हवाला देकर लोकसभा चुनाव से पहले भी फिल्म की रिलीज को रोक दिया गया था।
समानांतर सिनेमा को करते हैं समर्थन
‘केरला स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी समानांतर सिनेमा को वो पूरी तरह से सपोर्ट करते हैं। उनका मानना है कि ऐसी फिल्में बनती रहनी चाहिए। जिन्हें इन फिल्मों से आपत्ति होती है, वो इसका अंधा विरोध करने की बजाय अपनी बात रखें।
कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी को लेकर हो रहे विवाद पर सनोज मिश्रा ने कहा-कंगना वीरांगना हैं। जिस तरह से कंगना ने बॉलीवुड तानाशाही और सिंडिकेट के खिलाफ आवाज उठाई है, वह काबिले तारीफ है। जहां लोग भारत की इमरजेंसी के बारे में बात करने से भी बचते हैं, उस मुद्दे पर फिल्म बनाने की हिम्मत सिर्फ कंगना ही कर सकती हैं।