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नेचर से कनेक्ट करें, काम से ब्रेक लें और आर्ट थैरेपी से जुडे

इंटरनेशनल सेल्फ केयर डे मसल्स रिलेक्सेशन, मेडिटेशन, सेटिंग बाउंड्रीज टेक्निक से करें सेल्फ केयर
नेचर से कनेक्ट करें, काम से ब्रेक लें और आर्ट थैरेपी से जुडे

प्रीति जैन। सेल्फ केयर को लेकर अब लोगों में जागरुकता बढ़ रही है। वे चाहते हैं कि ब्यूटी और फिजिकल फिटनेस के अलावा अपनी इनर इंजीनियरिंग पर भी ध्यान दें जिसके लिए वे अब कई तरह की टेक्निक अपनाने लगे हैं। क्लीनिकल साइकॉलोजिस्ट के मुताबिक हर व्यक्ति की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के साथ ही उसकी पर्सनालिटी देखकर उसे सेल्फ केयर के तरीके बताए जाते हैं। जिसमें नेचर से कनेक्शन बनाने से लेकर हर दिन कुछ वक्त साइलेंस को फॉलो करना भी बताया जाता है। मेडिटेशन, मसल्स रिलेक्सेशन, सेटिंग बाउंड्रीज और अपनी पसंदीदा एक्टिविटी की पहचान करना सिखाया जाता है। जब लोग इन बातों को समझ लेते हैं तो उन्हें पता चल जाता है कि उनके लिए सेल्फ केयर का मतलब क्या है। अब लोग इस तरह की टेक्निक सीखने में रुचि दिखाने लगे हैं।

सेट करें बाउंड्रीज

कई लोग दूसरे के कहे से बहुत जल्दी आहत हो जाते हैं। यह कई बार दुख का कारण बनता है, तो जिस तरह अपने घर में ब्राउंडी बनाकर अनवांछित प्रवेश को रोकते हैं, उसी तरह अपने जीवन में हर किसी विचारों को प्रवेश न करने दें। यह देखें कि बोलने वाला आपके लिए कोई महत्व रखता भी है या नहीं।

सेल्फ केयर में सीखा इमोशन बैलेंस करना

मैंने हाल में डॉ. रेखा भटनागर की आर्ट थैरेपी क्लास अटैंड की, जिसमें बताया गया कि किस तरह आर्ट से जुड़ी एक्टिविटीज मेंटल वेल बीइंग के लिए खास होती हैं। इस सेशन में जाना कि स्ट्रेस रिलीज करने और खुद के साथ रहने में यह काफी मदद करती हैं। इसके जरिए हम अपने इमोशंस को बैलेंस कर पाते हैं। अपने काम से कभी-कभी ब्रेक लें। नेचर वाली जगहों पर जब वक्त मिले समय बिताएं। आर्ट थैरेपी जैसे सेशन अटेंड करें। - तान्या छवानी, आर्ट थैरेपी प्रतिभागी

बर्नआउट के कारण जानें और निजात पाएं

जिन बातों से स्ट्रेस होता है उन बातों व बर्नआउट के कारणों को जाने। जो बातें नियंत्रण में नहीं है उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश न करें। फैमिली में किसी को बदलने की कोशिश में खुद स्ट्रेस के शिकार बन जाते हैं। यह कोशिश एक सीमा तक होना चाहिए लेकिन जब खुद ही मानसिक रूप से आहत महसूस करने लगें तो फिर चीजों को स्वीकार करके अपने मन को हल्का रखने की कोशिश करें। - नीतू गौतम, मेडिटेशन एक्सपर्ट

चुप रहने को कई लोग निगेटिव लेते हैं लेकिन ऐसा नहीं है, कुछ वक्त खुद के साथ रखकर अपने ऊपर विचार करना। वहीं, मेडिटेशन में कई लोगों का मन नहीं लगता को उन्हें एक कहानी सुनाती हूं, एक मोनेस्ट्री में एक बच्चा संत के पास दौड़ता हुआ आया कि इस आश्रम में बहुत शोर है और मुझे मेडिटेशन करने के लिए दूसरे आश्रम भेज दीजिए। संत ने उस बच्चे से कहा कि तुम एक चम्मच में पानी भरकर पूरी मोनेस्ट्री की परिक्रमा करो लेकिन पानी नहीं गिरना चाहिए। ऐसा होने पर तुम्हें दूसरे आश्रम भेज दूंगा। बच्चे ने बिना पानी की एक बूंद चम्मच से गिराए परिक्रमा पूरी की। तब संत ने कहा क्या परिक्रमा करते वक्त तुम्हें शोर सुनाई दिया तो उसने कहा, नहीं। संत ने बच्चे से कहा, माइंड, बॉडी और सोल की एकाग्रता की वजह से तुम फोकस कर पाए और बाहरी शोर तुम्हें प्रभावित नहीं कर सका। ध्यान के लिए बस इसी एकाग्रता की जरूरत है। - सोनम छतवानी, क्लीनिक साइकॉलोजिस्ट

People's Reporter
By People's Reporter

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