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पुरानी माचिसों के ऑनलाइन बिक रहे कलेक्शन, मार्केट में अभी भी मौजूद हैं 80 तरह के ब्रांड्स

समय के साथ भले ही माचिस का इस्तेमाल कम हुआ हो, लेकिन अभी भी इसका बाजार है कायम
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पुरानी माचिसों के ऑनलाइन बिक रहे कलेक्शन, मार्केट में अभी भी मौजूद हैं 80 तरह के ब्रांड्स
प्रीति जैन- माचिस का इस्तेमाल हम सभी ने कभी न कभी किया होगा और आज भी करते हैं। छोटी सी माचिस की डिब्बी की कहानी बस इतनी नहीं है, बल्कि इसका अच्छा खासा इतिहास रहा है और माचिस की डिब्बियों से कार, पैन स्टैंड, सोफा, कुर्सी जैसी चीजें बनाकर बच्चों ने अपना खूब मनोरंजन भी किया है। कई लोग माचिस की खाली डिब्बियों के कवर की कटिंग करके भी रखा करते ताकि एक कलेक्शन तैयार हो जाए क्योंकि देशभर में माचिस सैकड़ों नाम से आती रही हैं। यही वजह है कि अब माचिस की डिब्बियों के कवर ऑनलाइन 500 रुपए से लेकर 3000 रुपए तक में सेल हो रहे हैं। वहीं, कॉलेज कैंटीन में गिलास में माचिस उछालकर डालने जैसे गेम्स भी खूब प्रचलन में रहे। वर्तमान में भी लगभग 80 तरह की माचिस आ रहीं हैं।

ऑनलाइन भी माचिस के ढेरों ब्रांड

माचिस की डिब्बियों को लेकर जब हमने मार्केट में तलाश शुरू की तो पता चला कि आज भी माचिस के कई ब्रांड मौजूद हैं और माचिस के कवर अभी भी पहले की तरह ही आते हैं। जुमेराती के होलसेल मार्केट से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स व ट्रेडर्स की वेबसाइट पर सैकड़ों ब्रांड्स देखे जा सकते हैं। एक माचिस की डिब्बी की कीमत 1 रुपए से लेकर 3 रुपए तक है।

पं.बंगाल से तमिलनाडु आया था माचिस उद्योग

भारत में पहली बार 1910 में जापानी प्रवासियों ने कोलकाता में माचिस बनाना शुरू किया था। लेकिन चूंकि दूसरा विश्वयुद्ध शुरू हो गया तो माचिस का कारोबार तमिलनाडु शिफ्ट हो गया। साल 1927 में शिवाकाशी में नाडार बंधुओं ने माचिस का उत्पादन शुरू किया। तब से आज तक तमिलनाडु मैच बॉक्स इंडस्ट्री का गढ़ बना हुआ है। भारतीय माचिस सबसे ज्यादा शिवाकाशी में बनती हैं।

मार्केट में वर्तमान में मिलने वाले माचिस ब्रांड

महान कमल - हाथी - तीर - तोता -किसान -उत्सव -स्पेशल 98 -कार्टून -टैंक -चाबी(की) -ओलंपिक -होमलाइट -लाइट-अप -सन -स्टार -कड़क -साइकिल-जहाज (शिप) -जुरासिक पार्क -होम क्लासिक -महावीर -चाकू -स्काई बर्ड -कैंची -ईगल-राधा रानी -सोना सिक्का -केक -बुल -होम क्लासिक -एटीएम

माचिस पर फ्रीडम फाइटर से लेकर सेलेब्स तक देखे

भारत में शिवाकाशी, काझुगुमलाई, कोविलपट्टी, तेनकाशी और सत्तुर में माचिस उद्योग हैं। माचिस के कवर के ऊपर फ्रीडम फाइटर से लेकर बॉलीवुड और साउथ के सुपरस्टार सबसे ज्यादा देखे गए। इसके अलावा ताजमहल, लाल किला, कुतुब मीनार भी दिखीं। गांधीजी, छत्रपति शिवाजी, महाभारत, भांगड़ा, नंदी, गंगा, गैंडा, रथ यात्रा, हिमालय, मंटो, अप्पू, चीता, मजदूर, कुली जैसे कई चिन्ह दिखे। - बीके लोखंडे, क्यूरेटर, बिड़ला संग्रहालय

पहले ब्रांड पर जोर नहीं था, इसलिए घरेलू नाम रखे

पहले के समय में ब्रांड नाम से लोग चीजों को याद नहीं रखते थे, न ही इस बात पर जोर रहता था। घरेलू नाम वाली चीजों पर प्रोडक्ट्स के नाम रखे जाते थे। अब माचिस की इतनी कंपनियां थीं कि ग्राहक याद कैसे रखें, इसलिए ऐसे नामों का चुनाव किया गया जो कि दैनिक जीवन में इस्तेमाल होते थे। मुझे याद है कि डाकू नाम से भी माचिस आती थी। हम कॉलेज के दिनों में माचिस को गिलास में डालने वाले गेम खेलते थे। - राजीव मिश्रा, मार्केटिंग एंड एडवरटाइजिंग प्रोफेशनल
People's Reporter
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