
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 7 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान 15.26 अरब डॉलर की वृद्धि हुई, जो कि पिछले दो वर्षों में सबसे बड़ा साप्ताहिक उछाल है।
653.96 अरब डॉलर पर पहुंचा विदेशी मुद्रा भंडार
RBI के अनुसार, 7 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 653.96 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे पहले, 29 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 1.78 अरब डॉलर घटकर 638.69 अरब डॉलर रह गया था। हालांकि, सितंबर 2024 में यह भंडार 704.88 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर था। लेकिन पिछले कुछ महीनों में रुपये में उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए आरबीआई द्वारा किए गए विदेशी मुद्रा बाजार हस्तक्षेप और पुनर्मूल्यांकन के कारण भंडार में गिरावट देखी गई थी।
डॉलर की खरीद से बढ़ा भंडार
आरबीआई के डेटा के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में यह उछाल मुख्य रूप से 28 फरवरी को किए गए 10 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा विनिमय (Forex Swap) के कारण हुआ। इस दिन आरबीआई ने रुपए के मुकाबले डॉलर खरीदा था, जिससे प्रणाली में तरलता बढ़ाने में मदद मिली।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 13.99 अरब डॉलर की वृद्धि
समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे महत्वपूर्ण घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (Foreign Currency Assets – FCA) 13.99 अरब डॉलर बढ़कर 557.28 अरब डॉलर हो गई। डॉलर के संदर्भ में इन परिसंपत्तियों में अन्य मुद्राओं (यूरो, पाउंड, येन आदि) में रखे गए भंडार का मूल्य परिवर्तन भी शामिल होता है।
गोल्ड रिजर्व में गिरावट, SDR और IMF भंडार में वृद्धि
गोल्ड रिजर्व का मूल्य 1.05 अरब डॉलर घटकर 74.32 अरब डॉलर हो गया। विशेष आहरण अधिकार (SDR) 21.2 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.21 अरब डॉलर हो गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत का आरक्षित भंडार 6.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.14 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
क्या है इस बढ़ोतरी का असर
इस रिकॉर्ड वृद्धि से भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से रुपए की स्थिरता बनी रहेगी। आयात और विदेशी कर्ज चुकाने में आसानी होगी। निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।
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