
नई दिल्ली। भारत में कैंसर के करीब 26 प्रतिशत मरीजों को सिर और गर्दन में कैंसर है। ऐसे मामलों में वृद्धि ही हो रही है। शनिवार को विश्व सिर और गला कैंसर दिवस पर यह अध्ययन जारी किया गया। देश के 1869 कैंसर मरीजों पर यह अध्ययन किया गया है। एनजीओ कैंसर मुक्त भारत फाउंडेशन ने एक मार्च से 30 जून तक का डेटा एकत्र करके यह अध्ययन किया। एनजीओ का नेतृत्व कर रहे कैंसर विशेषज्ञ डॉ. आशीष गुप्ता ने कहा कि भारत में विशेष रूप से युवाओं में सिर और गर्दन का कैंसर तेजी से बढ़ रहा है।
एआई से पहचान आसान
कैंसर के इलाज में तकनीक का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसी क्रम में अब एआई से कैंसर का इलाज आसान हो रहा है। गौरतलब है कि एआई एल्गोरिदम तेजी से कैंसर के पैटर्न की पहचान कर लेता है। इससे कम समय में बेहतर इलाज संभव हो जाता है। एआई मरीज के स्वस्थ होने की संभावना को भी बढ़ा रहा है।
रोका जा सकता है गर्दन का कैंसर
अन्य कैंसरों के विपरीत सिर और गर्दन के अधिकांश कैंसर रोके जा सकते हैं, जिसका कारण अज्ञात है। इसे जीवनशैली में बदलाव करके रोका जा सकता है। गुप्ता ने कहा, तंबाकू छोड़ने के लिए जागरूकता बढ़ाने और रोग का शीघ्र पता लगाने के लिए प्रारंभिक जांच कराने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत में कैंसर के लगभग दो तिहाई मामलों का पता देर से चलता है, जिसकी वजह संभवत: उचित जांच नहीं कराया जाना है। कैंसर मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य प्रारंभिक दौर में पहचान कर कैंसर के मामलों और प्रभाव को कम करना है।
गर्दन और सिर के कैंसर के लक्षण
- मुंह या होंठों पर घाव, जो 3 सप्ताह से ज्यादा समय तक ठीक न हो
- चेहरे या गर्दन में गांठ या सूजन निगलने में कठिनाई या दर्द होना
- आवाज में बदलाव या भारीपन
- कान में दर्द या सुनने में कठिनाई
- नाक से खून आना
- दांतों का ढीला होना
भोपाल में सबसे ज्यादा कौन सा कैंसर
पुरुष महिला
मुंह ब्रेस्ट
जीभ सर्विकल
लंग्स ओवरी