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CM शिवराज ने किया कृषक मित्र योजना का शुभारंभ, खुद भरवाया ऑनलाइन फॉर्म, कहा- MP ने कृषि के क्षेत्र में कई नए रिकार्ड बनाएं

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में ‘मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना’ का शुभारंभ किया। इस दौरान योजना का ऑनलाइन फॉर्म भरवाकर हितग्राहियों से फार्म भरवाने के कार्य की शुरुआत भी की और किसान भाई-बहनों को शुभकामनाएं दीं।

इस योजना की पहली हितग्राही हरदा के निरपतिया गांव से आई नमिता निरावे बनीं, जिनका ऑनलाइन फॉर्म सीएम शिवराज ने खुद भरवाया। इसके अलावा सीहोर के भैरुंदा से आए एक और किसान का फॉर्म भी सीएम ने भरवाया। इस दौरान कृषि मंत्री कमल पटेल, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और किसान बड़ी संख्या में मौजूद थे।

किसानों को 0% दिया जा रहा लोन : सीएम

इस अवसर पर सीएम शिवराज ने अपने संबोधन में कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, हमारे प्राणदाता भी हैं। किसानों के अथक परिश्रम और मेहनत के कारण ही मध्यप्रदेश ने कृषि के क्षेत्र में कई नए रिकार्ड स्थापित किए हैं। हमने किसानों के कल्याण के लिए हर संभव प्रयास किए। किसानों को जीरो प्रतिशत ब्याज पर कृषि लोन उपलब्ध कराने का भी काम किया। हमारे अन्नदाता ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी, प्रदेश के अन्न के भंडार भर दिए। सभी नदी, तालाब और डैम भर गए हैं। विंध्य में सड़कों का जाल हो, नहरों का निर्माण हो, सिंचाई की व्यवस्था हो, सोलर पावर प्लांट लगाना हो या निवेश के प्रयास हों, सरकार ने इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी है।

 

सिंचाई की क्षमता बढ़कर 47 लाख हेक्टेयर हो चुकी : सीएम

सीएम ने कहा कि एक जमाना वह भी था जब जब 3 से 4 घंटे से ज्यादा बिजली नहीं मिलती थी। बिजली का कुल उत्पादन 2900 मेगावाट होता था। आज मध्यप्रदेश में 29 हजार मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। सिंचाई की क्षमता 7 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 47 लाख हेक्टेयर हो चुकी है।

इस प्रकार है योजना

किसानों को स्थाई कृषि पम्प कनेक्शन देने के लिए मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना शुरू की गई है। मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना के तहत 3 हॉर्स पावर या अधिक क्षमता के स्थाई पंप कनेक्शन के लिए 200 मीटर तक की दूरी के 11 केवी लाइन का विस्तार एवं ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाएगा। इस योजना के अंतर्गत समस्त सामग्री सहित विस्तार कार्य एवं इसका संधारण विद्युत वितरण कंपनी द्वारा किया जाएगा। इस कार्य का 50 प्रतिशत व्यय शासन द्वारा और 50 प्रतिशत कृषक या कृषक समूह द्वारा वहन किया जाएगा। योजना के पहले वर्ष में 10 हजार पंप के लिए लक्ष्य रखा गया है। योजना दो वर्ष तक प्रभावशील रहेगी।

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