
भोपाल। राजधानी से सटे हुए रातापानी अभ्यारण्य को जल्दी टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव में मंगलवार को हुई स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में हर झंडी दे दी है। उन्होंने अधिकारियों को ये निर्देश दिए हैं कि टाइगर रिजर्व बनाने की तैयारी करें, इसकी जद में जो गांव आ रहे हैं, वहां ग्रामीणों से सहमति के उन्हें विस्थापित करने अथवा सीमा से बाहर करने का प्रस्ताव तैयार करें। एनटीसीए से रातापानी को टाइगर रिजर्व मंजूरी मिलना आसान होगी, क्योंकि इस क्षेत्र में 70 से अधिक बाघ हैं। बोर्ड के सदस्यों ने कहा कि यहां से विस्थापित होने वाले लोगों बेहतर सुविधाएं दी जाए।
मुख्यमंत्री मंत्रालय में मप्र राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में वन मंत्री नागर सिंह चौहान, वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, सीएस वीरा राणा, एसीएस वन जेएन कंसोटिया उपस्थित थे। रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव 2008 से अटका था। कमलनाथ सरकार में प्रस्ताव तैयार हो गया था, लेकिन सरकार गिर गई थी।
गांधी सागर में चीता छोड़ेंगे
बैठक में बताया गया कि चीता प्रोजेक्ट के आगामी चरणों के लिए दक्षिण अफ्रीका और केन्या के दलों ने गांधी सागर अभ्यारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण किया है। गांधी सागर अभ्यारण्य में चीता पुनर्स्थापना के लिए सभी तैयारी पूरी कर ली गई हैं। क्षेत्र में चीतलों की संख्या बढ़ाने के लिए कान्हा और अन्य स्थानों से उनका पुनर्स्थापन किया गया है। कान्हा और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से संजय टाइगर रिजर्व में 50 गौरों की पुनर्स्थापना भी की गई है।
इन प्रस्तावों को मिली मंजूरी
बैठक में रातापानी अभ्यारण्य के अंतर्गत बमनई जीपी से देलावाड़ी तक मार्ग के किनारे राइट-ऑफ-वे में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने के लिए 0.090 हेक्टेयर वन भूमि भारत संचार निगम, औबेदुल्लागंज को उपयोग पर दिए जाने की वन्य प्राणी अनुमति को अनुमोदन प्रदान किया गया। माधव राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत वन भूमि में मुख्य पेयजल पाइप लाइन संबंधी विषय, बैतूल और नर्मदापुरम जिले में जुझारपुर से ढोहरामोहार के मध्य तीसरी रेलवे लाइन के निर्माण के लिए वन भूमि रेलवे को देने की अनुमति पर विचार-विमर्श हुआ।