
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। महाराष्ट्र में सरकार गठन के सात दिन बाद गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। इससे पहले, बुधवार देर रात उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से भी चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात में महाराष्ट्र कैबिनेट के फॉर्मूले पर बातचीत हुई है और 14 दिसंबर को मंत्रियों को शपथ दिलाया जा सकती है।
क्या हो सकता है कैबिनेट फॉर्मूला
डिप्टी सीएम अजित पवार भी दिल्ली में हैं और वे भी संसद में अमित शाह से मुलाकात करने पहुंचे। हालांकि, सरकार में सहयोगी और दूसरे डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे इस बैठक में शामिल नहीं हुए। मंत्रिमंडल विस्तार के लिए बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) के बीच फॉर्मूला लगभग तय हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी को 20, शिवसेना को 12 और एनसीपी को 10 मंत्री पद मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री समेत राज्य में कुल 43 मंत्री होंगे।
गृह मंत्रालय को लेकर फंसी है पेंच
गृह मंत्रालय के बंटवारे को लेकर अभी सहमति नहीं बन पाई है। मौजूदा डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस गृह मंत्रालय अपने पास रखना चाहते हैं। वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) का कहना है कि अगर डिप्टी सीएम का पद उन्हें मिला है, तो गृह मंत्रालय भी उनके पास ही होना चाहिए।
14 दिसंबर को हो सकती है मंत्रियों की शपथ
सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र में 14 दिसंबर को मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्रियों की शपथ ग्रहण हो सकती है। हालांकि, गृह मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों को लेकर अंतिम सहमति का इंतजार है। मंगलवार रात मुख्यमंत्री फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और अजित पवार के बीच करीब 90 मिनट की बैठक हुई। इसमें मंत्रिमंडल के गठन, विभागों के बंटवारे और विभिन्न जिलों के प्रभारी मंत्रियों पर चर्चा हुई।
बता दें, महाराष्ट्र चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन में प्रचंड जीत हासिल की है, जिसमें बीजेपी ने 132, शिवसेना ने 57 और एनसीपी ने 41 सीटें अपने नाम किया। 23 नवंबर को नतीजे आए और 5 दिसंबर को फडणवीस ने सीएम, एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने डिप्टी सीएम की शपथ ली थी।
कौन-सा विभाग किसके पास?
भाजपा ने गृह, राजस्व, उच्च शिक्षा, कानून, ऊर्जा और ग्रामीण विकास अपने पास रखने का प्रस्ताव दिया है। वहीं, शिवसेना को हेल्थ, शहरी विकास, सार्वजनिक कार्य और उद्योग विभाग देने की पेशकश की गई है। एनसीपी (अजित गुट) को वित्त, योजना, कृषि और सहयोग जैसे अहम विभाग दिए जा सकते हैं।
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