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भोपाल में महिलाओं के लिए ‘स्त्री’ का आयोजन: फ्लेक्सिबल टाइम कल्चर अपनाना है जरूरी, पूरी दुनिया में चला “ओ स्त्री फिर आना”

भोपाल| आज जब हम हर क्षेत्र में महिलाओं की बात करते हैं, तो हम बात करते हैं उनके मेहनत की, काम के प्रति उनके समर्पण की और खुद को दुनिया के सामने साबित करने की उनकी जिद्द की। चाहे घर संभालना हो या करियर को नई ऊंचाइयों तक ले जाना, महिलाओं ने हर दिशा में अपनी क्षमता को दुनिया के सामने साबित किया है। इसी क्षमता को मनाने के लिए 7 दिसंबर को भोपाल के मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MANIT) में महिलाओं का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम को नाम भी यहां ‘स्त्री’ दिया गया। यहां देश में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाली ऐसी कई महिलाएं उपस्थित रहीं। साथ ही यहां महिलाओं द्वारा निर्मित किए जाने वाले हर वस्तु के स्टॉल भी लगाए गए। इन महिलाओं को देखकर लोगों का कहना है कि वाकई में इन महिलाओं की देश को जरूरत है। इसलिए हम भी कह रहे हैं- “ओ स्त्री कल फिर आना”

 महिलाओं को अपनाना चाहिए फ्लेक्सिबल टाइम कल्चर 

आकाशगंगा की संरचना, तारा निर्माण और प्री एम.एस तारे जैसी कई खोजों के लिए प्रसिद्ध और विज्ञान श्री अवॉर्ड से सम्मानित प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम भी इस कार्यक्रम में शामिल हुई।  टेक्नोलॉजी फील्ड के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा की पहले इस फील्ड में महिलाएं नहीं होती थी, लेकिन समय के साथ ये बदल गया है। महिलाओं के हक के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा- “दुनिया के सामने आने के लिए खुद को मजबूत बनाना जरूरी है, और हम इसी पर काम कर रहे हैं। महिलाओं को फ्लेक्सिबल टाइम कल्चर अपनाना होगा, क्योंकि जो महिला घर और करियर दोनों संभाल रही है, वह 9 से 5 की नौकरी नहीं कर सकती।” 

चंद्रयान-3 की प्रोजेक्ट मैनेजर फिल्म से नाराज 

चंद्रयान-3 की प्रोजेक्ट डायरेक्टर सीनियर साइंटिस्ट डॉक्टर माधवी ठाकरे का पीपुल्स अपडेट से कहना है की- “किचन से आईडिया आने वाली बात बिलकुल गलती है। फील्ड पर जब हम काम करते है तो वो फिल्मों के दिखाए तरीके से बेहद अलग होता है। उन्होंने फिल्म मिशन मंगल को सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट बताया।” उन्होंने फिल्म मिशन मंगल की कड़ी निंदा की हैं।

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