CGPSC घोटाले में टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज, 3.45 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप

रायपुर/बिलासपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका सामने आती है। गंभीर बीमारी या हिरासत में जरूरी चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के पर्याप्त प्रमाण के अभाव में PMLA के तहत विशेष राहत नहीं दी जा सकती।
मेडिकल आधार पर भी नहीं मिली राहत
सोनवानी की ओर से अदालत में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए जमानत मांगी गई थी। बचाव पक्ष ने बताया कि हृदय संबंधी परेशानी के कारण 20 अगस्त 2026 को उन्हें अस्थायी पेसमेकर लगाया गया था और स्थायी पेसमेकर लगाने की सलाह दी गई थी। उम्र और स्वास्थ्य को आधार बनाकर राहत देने की मांग की गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत के समक्ष यह पर्याप्त रूप से साबित नहीं हुआ कि आरोपी की स्थिति जानलेवा है या जेल में उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
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ED का दावा—33 से अधिक अभ्यर्थियों से जुटाए गए करीब 3 करोड़ रुपये
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक, CGPSC की वर्ष 2020-21 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के दौरान आर्थिक लेन-देन हुआ। एजेंसी का आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक कराने और पसंदीदा अभ्यर्थियों के चयन में मदद करने के बदले रकम जुटाई गई। ED ने अपराध से अर्जित राशि लगभग 3.45 करोड़ रुपये बताई है। इसमें 33 से अधिक अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब 3 करोड़ रुपये जुटाने और अलग-अलग माध्यमों से रकम पहुंचाने का आरोप शामिल है। ये जांच एजेंसी के आरोप हैं, जिनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होनी है।
परिवार की परिभाषा में बदलाव का आरोप
जांच एजेंसी ने भर्ती नियमों में 14 जुलाई 2021 को किए गए संशोधन पर भी सवाल उठाए हैं। ED का आरोप है कि परिवार की परिभाषा से ‘भतीजा’ शब्द हटाया गया, जिससे सोनवानी के भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी के क्रमशः डिप्टी कलेक्टर और DSP पद पर चयन का रास्ता बना। इस मामले में एजेंसी के आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा। आरोपों को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
CSR के 45 लाख रुपये और प्रश्नपत्र लीक का आरोप
ED ने बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण कुमार गोयल के माध्यम से ग्रामीण विकास समिति को CSR के नाम पर 45 लाख रुपये दिए जाने का भी उल्लेख किया है। एजेंसी का आरोप है कि यह रकम कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक कराने के बदले दी गई थी। जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।
2021 की परीक्षा में 1.29 लाख से अधिक अभ्यर्थी हुए थे शामिल
CGPSC की वर्ष 2021 की प्रारंभिक परीक्षा में 1,29,206 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इनमें से 2,548 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा और 509 अभ्यर्थी साक्षात्कार तक पहुंचे, जबकि अंतिम चयन 170 अभ्यर्थियों का हुआ। इस भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जनवरी 2026 में दाखिल आरोपपत्र में 29 लोगों को आरोपी बनाया था। मामले में जांच और न्यायिक कार्यवाही अलग-अलग स्तरों पर जारी है।
पहले भी खारिज हो चुकी थी जमानत
टामन सिंह सोनवानी को ED ने जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने 20 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अब हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिलने के बाद उनकी हिरासत जारी रहेगी, जब तक सक्षम अदालत से कोई अन्य आदेश नहीं मिलता।
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अब सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं सोनवानी
हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद सोनवानी के पास कानून के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल करने का विकल्प हो सकता है। परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बदलाव होने पर वे दोबारा जमानत की मांग भी कर सकते हैं। हालांकि, आगे की कानूनी कार्रवाई और उस पर फैसला संबंधित अदालत के अधिकार क्षेत्र में होगा। इस मामले में ED और अन्य जांच एजेंसियों की ओर से लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय में होना है। जब तक दोष सिद्ध नहीं होता, आरोपों को अंतिम अपराध साबित होने के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।




















