1450 मीटर नीचे समुद्र के अंदर मिला गैस का बड़ा खजाना! ONGC की खोज से भारत को क्या होगा फायदा?

समंदर की गहराई में हुई एक खोज भारत के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आई है। ओडिशा के तट से करीब 43 किलोमीटर दूर ONGC को गहरे समुद्र में गैस मिली है। महानदी बेसिन में करीब 1450 मीटर की गहराई पर हुई इस खोज के बाद पिछले तीन दिनों से कुएं से लगातार अच्छी रफ्तार और दबाव के साथ गैस निकल रही है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि यहां गैस का कुल भंडार कितना है।
1450 मीटर की गहराई पर मिली गैस
ONGC ने महानदी बेसिन में एमडीडब्ल्यू-28 नाम के कुएं में यह खोज की है। यह कुआं समुद्र में करीब 770 मीटर गहरे पानी में स्थित है और ओडिशा तट से लगभग 43 किलोमीटर दूर है। कंपनी के मुताबिक, 18 सितंबर को यहां गैस मिलने की पुष्टि हुई। इसके बाद से कुएं से लगातार गैस निकल रही है। गैस की मात्रा और दबाव को देखते हुए इस खोज को अहम माना जा रहा है।
अभी कितना गैस भंडार है, पता नहीं
फिलहाल ONGC ने यह नहीं बताया है कि इस कुएं में कुल कितनी गैस मौजूद है। अब आगे की जांच और तकनीकी अध्ययन से पता चलेगा कि यहां से कितनी गैस निकाली जा सकती है। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इस गैस का व्यावसायिक उत्पादन कितना फायदेमंद रहेगा। यानी गैस निकालने में होने वाली लागत और उससे मिलने वाले संभावित फायदे का आकलन किया जाएगा।
भारत के लिए क्यों अहम है ये खोज?
भारत अपनी तेल और गैस की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से खरीदता है। ऐसे में देश के समुद्री इलाकों में तेल और गैस के नए भंडार मिलने से घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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महानदी बेसिन में पहले भी मिली हैं गैस खोज
महानदी बेसिन ONGC के लिए नया क्षेत्र नहीं है। कंपनी ने 2024 में इसी बेसिन में उत्कल और कोणार्क नाम की गैस खोजों की जानकारी दी थी। अब एमडीडब्ल्यू-28 में मिली गैस को इन खोजों के साथ जोड़कर क्षेत्र में बड़े स्तर पर उत्पादन की संभावनाएं देखी जा रही हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी इसे भारत के समुद्री तेल-गैस खोज अभियान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
एक साथ विकसित किए जा सकते हैं कई क्षेत्र
हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, महानदी बेसिन में हुई अलग-अलग खोजों को साझा सुविधाओं के जरिए विकसित करने की संभावना बन सकती है। अगर ऐसा होता है तो तेल और गैस उत्पादन से जुड़े बुनियादी ढांचे का साझा इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे नई परियोजनाओं में लगने वाला समय और खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, उत्कल और कोणार्क खोजों में मौजूद भंडार और उनके व्यावसायिक फायदे की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
25 जुलाई से शुरू हुई थी कुएं की खुदाई
एमडीडब्ल्यू-28 कुएं की खुदाई 25 जुलाई को शुरू हुई थी। यह ONGC के मौजूदा अभियान के तहत खोदे जाने वाले चार कुओं में से पहला कुआं है। इस अभियान का मकसद महानदी बेसिन के उन गहरे समुद्री इलाकों में तेल और गैस की तलाश करना है, जहां अभी बड़े पैमाने पर खोज नहीं हुई है।
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'समुद्र मंथन' अभियान का हिस्सा है खोज
यह पूरी खोज 'समुद्र मंथन' पहल के तहत हो रही है। इसका उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्र में मौजूद तेल और गैस संसाधनों की तलाश को बढ़ाना है। सरकार ने जुलाई में इस पहल को 84,084 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी थी। यह कार्यक्रम 2030-31 तक चलाया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इसके जरिए देश के हाइड्रोकार्बन भंडार में 600 मिलियन टन से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है।
महानदी बेसिन में कितने संसाधन?
सरकारी अनुमान के मुताबिक, महानदी बेसिन के जमीन वाले हिस्से में करीब 45 मिलियन टन और उथले समुद्री पानी वाले क्षेत्र में करीब 100 मिलियन टन संसाधन मौजूद हो सकते हैं। वहीं, गहरे पानी वाले हिस्से में मौजूद संसाधनों का अभी पूरा आकलन नहीं हुआ है। ऐसे में एमडीडब्ल्यू-28 में मिली गैस को आगे की खोज के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब आगे क्या होगा?
ONGC अब इस कुएं में मिली गैस की मात्रा, दबाव और उत्पादन क्षमता का विस्तृत आकलन करेगी। इसके बाद यह तय होगा कि यहां बड़े स्तर पर गैस उत्पादन करना आर्थिक रूप से कितना सही रहेगा। कंपनी ने कहा है कि वह गहरे और बेहद गहरे समुद्री इलाकों में तेल और गैस की खोज जारी रखेगी। अगर आगे की जांच में यहां पर्याप्त भंडार की पुष्टि होती है, तो महानदी बेसिन भारत के घरेलू गैस उत्पादन के लिए एक अहम क्षेत्र बन सकता है।




















