
बुरहानपुर। वन मंडल बुरहानपुर के वन परिक्षेत्र नेपानगर के दक्षिण हसनपुरा के जंगल में एक मृत बाघ पाया गया है। बाघ की मौत दो से तीन दिन पहले हुई बताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने बाघ की मौत की सूचना वन विभाग को दी, जिसके बाद बुरहानपुर वन मंडल के अधिकारी और नेपानगर रेंजर सहित वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची। वन विभाग का अमला ने ड्रोन तथा डॉग स्क्वाड की मदद से जंगल में सर्चिंग की गई।
मौत का कारण स्पष्ट नहीं
अधिकारियों के अनुसार, मृत बाघ नर था और उसकी आयु लगभग सात से आठ वर्ष के बीच थी। शनिवार को प्रोटोकाल के तहत 8 डॉक्टरों की पैनल ने बाघ के शव का पोस्टमार्टम किया। डीएफओ विजय सिंह ने बाघ के शिकार होने की आशंका को खारिज किया है। उनका कहना था कि अगर बाघ का शिकार किया जाता, तो शिकारी उसके पंजे, नाखून, मूंछ के बाल, दांत आदि निकाल लेते, जबकि इस बाघ के शरीर के सभी अंग सलामत पाए गए। इसके अलावा, बाघ की मृत्यु दो से तीन दिन पहले होने का अनुमान है।
बाघ की मृत्यु के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। अधिकारियों ने भूख को एक संभावित कारण बताया है, क्योंकि नेपानगर क्षेत्र में बाघ का मुख्य भोजन जैसे चीतल, हिरण आदि की कमी हो सकती है। हालांकि, वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मेलघाट टाइगर रिजर्व से आते हैं बाघ
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बुरहानपुर जिले के जंगलों में बाघों की स्थाई आबादी नहीं है। लेकिन यह क्षेत्र महाराष्ट्र के मेलघाट टाइगर रिजर्व के पास स्थित है, जहां से बाघ अक्सर विचरण करते हुए बुरहानपुर क्षेत्र में आ जाते हैं। पिछले साल भी नेपानगर वन परिक्षेत्र में एक बाघ मृत अवस्था में पाया गया था। इसके अलावा, क्षेत्र में भी काफी समय से ग्रामीणों ने बाघ को गांवों के आसपास देखा था और पालतू मवेशियों के शिकार की शिकायत की थी। वन विभाग ने कई बार सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन उसे कहीं भी बाघ के पग मार्क नहीं मिले थे।
ड्रोन और डॉग स्क्वाड से की सर्चिंग
शनिवार को डीएफओ विजय सिंह, एसडीओ वन मानसिंह खराड़ी, और रेंजर श्रीराम पांडेय सहित अधिकारियों ने जंगल में सर्चिंग की। वन विभाग ने ड्रोन की मदद भी ली, लेकिन कुछ खास जानकारी नहीं मिली। इसके अलावा, डॉग स्क्वाड को भी बुलाया गया था। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की जांच हर एंगल से की जा रही है।