
मनीष दीक्षित। लगभग 23 वर्षों बाद देश की संसद में एक बार फिर भाई-बहन की जोड़ी दिखाई दे सकती है। दरअसल, राहुल गांधी के वायनाड सीट छोड़ने के बाद कांग्रेस ने इस सीट से प्रियंका गांधी वाड्रा को प्रत्याशी घोषित किया है। यह पहला मौका होगा, जब प्रियंका कोई चुनाव लड़ेंगी। यदि प्रियंका वायनाड उपचुनाव जीत जाती हैं, तो लोकसभा में भाई-बहन की जोड़ी के तौर पर माधवराव सिंधिया और वसुंधरा राजे सिंधिया के बाद यह नई जोड़ी होगी। वसुंधरा राजे और माधवराव सिंधिया 2001 तक एक दशक से अधिक समय तक एक साथ ही लोकसभा के सदस्य रहे। हालांकि, वसुंधरा भाजपा से और माधवराव कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर संसद पहुंचे थे। प्रियंका के उपचुनाव लड़ने के फैसले से न केवल प्रियंका गांधी, बल्कि खुद गांधी परिवार एक इतिहास रचने जा रहा है। अगर वे जीतती हैं, उनकी मां सोनिया, भाई राहुल यानी तीन सदस्य संसद में होंगे। इससे पहले सोनिया और राहुल संसद में एक साथ रहे हैं।
संसद में परिवार की ये जोड़ियां भी
मां-बेटा : 2004 में राहुल और सोनिया गांधी भी पहली बार एक साथ सांसद चुने गए थे। इसी परिवार की सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और उनके पुत्र वरुण भी पहली बार एक साथ 2009 का लोस चुनाव जीते थे। इंदिरा गांधी के साथ, संजय गांधी भी सदन में पहुंचे थे। 1980 में उनकी मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में राजीव गांधी भी सदन के सदस्य बने।
पिता-पुत्री : महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार और उनकी पुत्री सुप्रिया सुले एक साथ 2009 के लोकसभा चुनाव में विजयी हुए थे।
पति-पत्नी : 2019 के लोकसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पंजाब की फिरोजपुर सीट से जीतकर संसद पहुंचे थे। उनकी पत्नी हरसिमरत कौर को बठिंडा से सांसद थीं। वहीं सपा नेता अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव भी एकसाथ सांसद रहे हैं। अभी भी दोनों साथ सांसद हैं।
ससुर-जमाई : देश के पूर्व फुटबॉलर प्रसून बनर्जी बंगाल की हावड़ा लोकसभा से टीएमसी से चुने गए हैं। उनके दामाद अबीर बिस्वास राज्यसभा के सदस्य हैं।
दो समधी : 80 के दशक में दो समधी कर्ण सिंह और माधवराव सिंधिया एक साथ सदन में रहे हैं।
ससुर और साले दोनों के साथ : कांग्रेस के सचिन पायलट संभवत: इकलौते नेता हैं जो ससुर फारुख अब्दुल्ला और साले उमर अब्दुला के साथ सदन में रहे हैं। सचिन का विवाह फारुख की बेटी से हुआ था।
संसद में पिता-पुत्र, चाचा- भतीजे की जोड़ियां भी रहीं
एचडी देवेगौड़ा-कुमारस्वामी : पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और उनके पुत्र और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी भी एक साथ लोकसभा में रहे हैं। पिता-पुत्र की जोड़ी पहली बार 2009 में एक साथ चुनकर लोकसभा पहुंची थी।
मुलायम सिंह-अखिलेश यादव : 1999 में मुलायम सिंह यादव ने कन्नौज और संभल दो सीटों से लोकसभा चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने कन्नौज सीट छोड़ दी थी। अखिलेश वर्ष 2000 के उपचुनाव में पहली बार सांसद बने और मुलायम सिंह के साथ संसद पहुंचे।
रामविलास-चिराग पासवान : राजनीति के मौसम वैज्ञानिक कहे जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और चिराग पासवान एक साथ 2014 में चुनकर लोकसभा पहुंचे थे। तब चिराग जमुई लोकसभा सीट और उनके पिता हाजीपुर लोकसभा से चुने गए थे।
चाचा-भतीजा : 2019 में पशुपति कुमार पारस ने हाजीपुर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी, जबकि राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान एक बार फिर जमुई से जीतने में कामयाब रहे। इस बार चिराग हाजीपुर से सांसद चुने गए हैं।
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