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दो पूर्व विधायकों की दावेदारी से भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं

विजयपुर विधानसभा : कांग्रेस के पास नामचीन चेहरा नहीं, भाजपा में बगावत का इंतजार

ग्वालियर। लोकसभा चुनाव के समय मुरैना- श्योपुर सीट पर संकट में फंसी भाजपा के लिए संकटमोचक बनकर आए रामनिवास रावत को विजयपुर उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार बनाया जाना लगभग तय है, लेकिन भाजपा के ही पूर्व विधायकद्वय सीताराम आदिवासी व बाबूलाल मेवरा ने भी अपनी दावेदारी कर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि कांग्रेस पूरी एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, लेकिन उसके पास कोई नामचीन नेता नहीं है।

सीताराम को मनाने के प्रयास, मेवरा भी नाराज

श्योपुर जिले में पूर्व विधायक सीताराम आदिवासी बड़ा चेहरा हैं, लेकिन रामनिवास रावत का नाम चलने से वे नाराज है। यहां सहरिया जनजाति वर्ग के करीब 60 हजार मतदाता हैं। सीताराम आदिवासी ने कहा भी था कि यहां रावत तो मात्र 15 हजार ही हैं। ऐसे में हमारी उपेक्षा क्यों। भाजपा के ही पूर्व विधायक बाबूलाल मेवरा भी दावेदार हैं। वह 2023 के विस चुनाव में रावत से चुनाव हारे हैं। मेवरा का तर्क है कि जिसके खिलाफ पूरी जिंदगी चुनाव लड़ता रहा, अब उसी के लिए कैसे वोट मांगें।

सीएम यहां दे चुके सौगात

10 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विजयपुर में रक्षाबंधन महोत्सव आयोजित कर करोड़ों रुपए के विकास कार्यों की सौगातें दे चुके हैं। साथ ही कराहल और वीरपुर पंचायतों को नगर परिषद बनाने की घोषणा भी कर दी।

दोनों पार्टियां ठोक रही ताल

कांग्रेस जिलाध्यक्ष अतुल सिंह चौहान का कहना है कि विजयपुर सामान्य सीट है, इसलिए कई लोग टिकट के दावेदार हैं। हम पूरी तरह तैयार हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जाट का कहना है कि रणनीति बनाकर काम शुरू कर दिया है। पार्टी में बगावत जैसी कोई बात नहीं है।

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