
नई दिल्ली। गुरुवार का दिन अडानी ग्रुप के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं रहा। अमेरिकी कोर्ट द्वारा रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोप में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी होने के बाद अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। इसके चलते गौतम अडानी के नेटवर्थ में एक ही दिन में लगभग 10.5 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। अडानी ग्रुप के कई शेयर लोअर सर्किट तक आ गए।
रिश्वतखोरी के आरोपों से मचा हड़कंप
अमेरिकी अभियोजकों ने अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे समेत आठ लोगों पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए हैं। इन पर भारतीय सरकारी अधिकारियों को 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देकर सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट हासिल करने का आरोप है। इन आरोपों के बाद अमेरिकी कोर्ट ने अडानी और उनके भतीजे के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिया है।
शेयर बाजार में गिरावट का असर
रिश्वतखोरी के इन आरोपों के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक अडानी इंटरप्राइजेज के शेयर 20% गिरकर 2,239.20 रुपए पर बंद हुए। इसके अलावा, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस और अडानी पोर्ट्स जैसे प्रमुख शेयरों में भी 20% का लोअर सर्किट लगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अडानी ग्रुप के सभी 11 शेयरों का कुल मार्केट कैप 2 लाख करोड़ रुपए घटकर 12.3 लाख करोड़ रुपए रह गया। यह 2023 की शुरुआत में हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद से ग्रुप का सबसे खराब कारोबारी दिन रहा।
गौतम अडानी की नेटवर्थ में भारी गिरावट
इस गिरावट से गौतम अडानी की नेटवर्थ में भारी कमी आई है। फोर्ब्स की रियल टाइम बिलेनियर्स लिस्ट के अनुसार, इस गिरावट के चलते गौतम अडानी की कुल संपत्ति 10.5 बिलियन डॉलर घटकर 59.3 बिलियन डॉलर रह गई है। यह गिरावट उन्हें दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की सूची में पीछे धकेल दिया है।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद सबसे बड़ी गिरावट
गुरुवार को अडानी ग्रुप के शेयरों में आई गिरावट हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। उस रिपोर्ट में ग्रुप पर वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद से ग्रुप लगातार विवादों में है।
क्या है हालिया विवाद
- दावा किया गया कि ये पूरा मामला अरबों डॉलर के मुनाफे से जुड़ा हुआ है। यूनाइटेड स्टेट्स अटॉर्नी ऑफिस के मुताबिक, अडानी ने भारत में सोलर एनर्जी से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर (करीब 2110 करोड़ रुपए) की रिश्वत देने का वादा किया था। इस प्रोजेक्ट से 20 साल में 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा मुनाफे का अनुमान था।
- अधिकारियों को ये रिश्वत 2020 से 2024 के बीच दिए जाने का आरोप लगाया गया है।इसके साथ ही ये आरोप भी लगाया गया है कि इस मुनाफे के लिए अमेरिका समेत अन्य देशों के निवेशकों और बैंकों से झूठ बोला गया।
- अडानी ग्रीन एनर्जी ने कॉन्ट्रैक्ट के तहत फंड देने के लिए अमेरिकी इन्वेस्टर्स और अंतर्राष्ट्रीय ऋणदाताओं से कुल 3 बिलियन डॉलर रकम जुटाई।
गौतम अडानी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
- अमेरिका में सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने इस मामले में गौतम अडानी के भतीजे सागर अडानी , अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के अधिकारियों समेत एक अन्य फर्म एज्योर पावर ग्लोबल लिमिटेड के कार्यकारी सिरिल काबेनेस के खिलाफ भी आरोप लगाए हैं।
- अडानी के अलावा शामिल 7 अन्य लोग सागर अडानी , विनीत एस जैन, रंजीत गुप्ता, साइरिल कैबेनिस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रूपेश अग्रवाल हैं।
- सागर और विनीत अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के अधिकारी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गौतम अडानी और सागर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। विनीत जैन 2020 से 2023 तक कंपनी के CEO थे।
- साइरिल कैबेनिस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रूपेश अग्रवाल ने ब्राइबरी (रिश्वत) स्कीम में ग्रैंड ज्यूरी, FBI और US सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) की जांच रोकने की साजिश रची। चारों ने स्कीम से जुड़े ईमेल, मैसेज और एनालिसिस भी मिटाए।
अमेरिका में क्यों दर्ज हुआ मामला
प्रोजेक्ट में अमेरिका के इन्वेस्टर्स का पैसा लगा होने की वजह से अमेरिका में मामला दर्ज हुआ है। अमेरिकी कानून के तहत उस पैसे को रिश्वत के रूप में देना अपराध है। अडानी ने बुधवार को ही 20 ईयर ग्रीन बॉन्ड की बिक्री से 600 मिलियन डॉलर जुटाने की घोषणा की थी। इसके कुछ घंटों बाद ही उन पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं।
ये भी पढ़ें- डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी को लेकर सख्त MHA, 17000 व्हाट्सएप अकाउंट्स किए ब्लॉक