
भोपाल। लव जिहाद को लेकर भोपाल सांसद प्रज्ञा ने सोमवार को कर्नाटक में हिंदुओं को घरों में हथियार रखने की सलाह दी। प्रज्ञा ने कहा- लव जिहाद करने वालों को लव जिहाद जैसा उत्तर दो। अपनी लड़कियों को सुरक्षित रखो। अपने घर में हथियार रखो। वे यहीं नहीं रुकीं। प्रज्ञा ने कहा- कुछ नहीं तो सब्जी काटने वाला चाकू जरा तेज रखो। उन्होंने कहा- मैं स्पष्ट बोल रही हूं कि हमारे घरों में भी सब्जी काटने के लिए हथियार तेज होना चाहिए। उन्होंने चाकू से हमारे हर्षा को गोदा था। उन्होंने चाकू से भाजपा, बजरंग दल, युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं को काटा है। तो हम भी चाकू तेज कर लें। पता नहीं, कब कैसा मौका आए। प्रज्ञा ने कहा- जब हमारी सब्जी अच्छे से कटेगी तो यकीन है कि दुश्मनों के मुंह और सिर भी अच्छे से कटेंगे।
कर्नाटक में कार्यक्रम में बोल रही थीं
प्रज्ञा रविवार को कर्नाटक के शिवमोगा में हिंदू जागरण वैदिक के दक्षिण क्षेत्र वार्षिक सम्मेलन में बोल रही थीं। उन्होंने कहा- हिंदुओं को उन पर और उनकी गरिमा पर हमला करने वालों को जवाब देने का पूरा अधिकार है। सोमवार को इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल रहा। प्रज्ञा इइसमें कह रही हैं कि उनके पास जिहाद की परंपरा है, अगर कुछ नहीं है, तो वे लव जिहाद करते हैं। अगर वे प्यार भी करते हैं, तो उसमें भी जिहाद करते हैं। प्रज्ञा ने कहा- हम भी प्यार करते हैं, भगवान से प्यार करते हैं, एक संन्यासी अपने भगवान से प्यार करता है और संन्यासी के अनुसार, जब तक सभी अत्याचारी और पापी लोगों को हटा नहीं दिया जाता है, तब तक ईश्वर द्वारा बनाई गई इस दुनिया में प्रेम की सच्ची परिभाषा जीवित नहीं रह सकती है।
कार्यकर्ता के घर पहुंचकर परिजनों से मिलीं
प्रज्ञा ने इस दौरान शिवमोगा में कार्यकर्ता हर्षा के घर जाकर उनके परिवार से मुलाकात की। पीएफआई के सदस्यों ने 28 फरवरी 2022 को हर्षा की तलवार से काटकर हत्या कर दी थी। हर्षा के घर से प्रज्ञा ने कहा – आज दक्षिण कर्नाटक के शिवमोगा में हर्षा हिंदू के घर पर आई हूं। हर्षा को 28 फरवरी को PFI के कार्यकर्ताओं ने तलवारों से काट दिया। सड़क पर हर्षा तड़प रहा था, लेकिन उस योद्धा ने हार नहीं मानी। उसने पूरे कर्नाटक और पूरे देश को जगा दिया और PFI पर बैन लगा। आज हिंदू जागरण मंच के कार्यक्रम में मैंने दक्षिण भारत में मुगलों से लड़ने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी। प्रज्ञा ने कहा- आज जब मैं यहां आई, तो लग रहा था कि मैं उस हर्षा के घर जा रही हूं, जो वीरगति को प्राप्त हुआ। मुझे लग रहा था कि उसके माता-पिता, बहनें सभी दुखी होंगे, आंखें नम किए बैठे होंगे, लेकिन जैसे ही मैं उसके दरवाजे पर आई, उसकी दोनों बहनें अश्विनी और रजनी ने मेरी आरती उतारी और मुस्कुराकर अभिनंदन किया। लग रहा था कि वे वीर योद्धा की बहनें हैं।