भोपाल : शुरू हुआ मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र, किसानों के मुद्दों को लेकर कांग्रेस का विधानसभा घेराव की कोशिश, पुलिस मुस्तैद

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो गया है। सदन की कार्यवाही की शुरुआत राज्यपाल मंगुभाई पटेल के अभिभाषण से हुई। सरकार 12 मार्च को राज्य का बजट पेश करेगी, जबकि पूरा सत्र 24 मार्च तक चलेगा, जिसमें कुल 9 बैठकें होंगी। लेकिन इस सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस ने किसानों के मुद्दों पर बड़ा प्रदर्शन किया और विधानसभा के घेराव की कोशिश की।
रविवार को विधानसभा घेराव को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।[/caption]
कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, काली टोपी पहनकर किया विरोध
किसानों की मांगों और विधानसभा चुनाव में किए गए वादों को लेकर कांग्रेस ने भोपाल में बड़ा प्रदर्शन किया। किसान कांग्रेस की अगुवाई में आयोजित इस प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान समेत कांग्रेस के बड़े नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने काली टोपी पहनकर अपना विरोध दर्ज कराया और इसी रूप में विधानसभा सत्र की कार्यवाही में भी शामिल हुए। कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार को एक साल से अधिक हो गया, लेकिन अब तक विधानसभा चुनाव में किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया। [caption id="attachment_155726" align="aligncenter" width="600"]
रविवार को विधानसभा घेराव को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।[/caption]
विधानसभा घेराव की कोशिश, पुलिस ने रोका
कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता भोपाल के रंगमहल चौराहे पर एकत्रित हुए, जहां से उन्होंने रोशनपुरा चौराहा होते हुए विधानसभा की ओर कूच करने की कोशिश की। इससे पहले पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने दावा किया था कि इस बार कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस की लाठियों, डंडों और पानी की बौछारों से नहीं डरेंगे और सरकार को घेरने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे। हालांकि, पुलिस ने इस प्रदर्शन को रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। रोशनपुरा चौराहे पर भारी बैरिकेडिंग कर दी गई थी, वहीं वाटर कैनन और टियर गैस के साथ पुलिस बल तैनात था।किसानों की मुख्य मांगें
कांग्रेस और किसान संगठनों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं,- फसलों के उचित दाम: गेहूं- 3,000 रुपए प्रति क्विंटल, धान- 3,100 रुपए प्रति क्विंटल, सोयाबीन- 6,000 रुपए प्रति क्विंटल।
- फसल क्षति पर मुआवजा: लहसुन, गोभी, टमाटर जैसी फसलों की बर्बादी पर 50,000 रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए।
- धान खरीदी की गारंटी: जिन किसानों की धान की खरीदी नहीं हो पा रही है, उसे सरकार खरीदे।
- बिजली बिलों में राहत: किसानों पर फर्जी केस लगने और बिजली बिलों के नाम पर शोषण बंद किया जाए।
- भूमि अधिकार में बदलाव: राजस्व पुस्तिका पत्रिका की धारा 6/4 में संशोधन कर पटवारी हल्का की बजाय खेत को इकाई माना जाए।
- भूमि अधिग्रहण मुआवजा: भूमि अधिग्रहण कानून के तहत किसानों को 4 गुना मुआवजा दिया जाए।












