
भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले के गोरमी के कृपे का पुरा गांव में आयोजित नेत्र शिविर में ऑपरेशन के बाद 6 बुजुर्गों की आंखों की रोशनी चली गई। शिविर का आयोजन संयुक्त समाजसेवी संस्था और निवारण हेल्थ वेलफेयर सोसाइटी द्वारा किया गया था, जिसमें ग्वालियर के कालरा हॉस्पिटल की टीम ने हिस्सा लिया। मरीजों ने डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए गोरमी थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
पीड़ितों ने इस मामले को लेकर प्रशासन से शिकायत की है। तहसीलदार मनीष दुबे ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
दूसरी आंख का ऑपरेशन कर दिया
दरअसल, मेहगांव अनुविभाग के गोरमी के कृपे का पुरा गांव में आयोजित नेत्र शिविर में आयोजकों ने जांच में ग्रामीणों को पहले मोतियाबिंद बताया, फिर उसी दिन ग्वालियर के कालरा अस्पताल लाकर 6 बुजुर्गों का ऑपरेशन कर दिया। गांव लौटने के बाद जब ग्रामीणों ने आंखें खोलीं तो उन्हें दिखना ही बंद हो गया। चिरोंजीलाल सखवार, भागीरथ सखवार, चुन्नीबाई, राजवीर और भूरीबाई व चमेली बाई ने कल गोरमी में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी आंखों की रोशनी चली गई है। एक बुजुर्ग की तो जिस आंख में समस्या थी, उसकी बजाय दूसरी आंख का ऑपरेशन कर दिया। वह अब दोनों ही आंखों से नहीं देख पा रहे हैं।
50 ग्रामीणों की आंखों की जांच
संयुक्त समाजसेवी संस्था एवं निवारण हेल्थ वेलफेयर सोसाइटी ने 9 दिसंबर को जिले के कृपे का पुरा में नेत्र परीक्षण शिविर लगाया था। इसमें ग्वालियर के कालरा हॉस्पिटल की टीम पहुंची थी। टीम ने 50 लोगों की आंखों की जांच की गई। जिसमें 8 ग्रामीणों की आंख में मोतियाबिंद पाए जाने पर उन्हें ग्वालियर लाया। यहां हॉस्पिटल में ऑपरेशन किया।
ऑपरेशन के बाद इनकी रोशनी गई
- चिरोंजीलाल सखवार (60)
- भागीरथ सखवार (70)
- चुन्नी बाई( 65)
- राजवीर (45)
- भूरी बाई (58)
- चमेली बाई (60)
- इन सभी ने गोरमी में शिकायत दर्ज कराई है कि ऑपरेशन के बाद उनकी रोशनी चली गई।
शिविर की अनुमति नहीं ली गई
भिंड के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. शिवराम सिंह कुशवाह ने बताया कि इस नेत्र शिविर की अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने कहा, “यह शिविर कैसे आयोजित किया गया, इसकी जांच की जाएगी। संबंधित अस्पताल और आयोजकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
तहसीलदार को दिया आवेदन
ऑपरेशन के कई दिनों के बाद भी ग्रामीणों की रोशनी वापस नहीं लौटी तो सभी पीड़ित एकत्रित होकर गोरमी थाने पहुंचे। कालरा आई हॉस्पिटल के डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पीड़ितों ने तहसीलदार मनीष दुबे को शिकायती आवेदन दिया। तहसीलदार ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।