
भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर के ‘अपना घर आश्रम’ में अजीब मामला देखने को मिला। यहां रिश्ते, इंसानियत और प्यार का एक अनूठा दृश्य देखने को मिला। एक पति करीब 18 साल बाद 16 शृंगार का सामान लेकर अपनी पत्नी को लेने पहुंचा। पति शिवलिगप्पा ने अपनी पत्नी को सिंदूर का टीका लगाकर मंगलसूत्र, कंगन, झुमके, बाली व वस्त्र पहनाए। उसके बाद अपने साथ घर ले गए। आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला है क्या
क्या है पूरा मामला
18 साल पहले कहीं चली गई थी पत्नी
- कर्नाटक निवासी ललिता 18 साल पहले मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के चलते अपने घर से निकल गई थी।
- परिजनों के द्वारा काफी तलाश की गई लेकिन जब वह नहीं मिली तो उन्हें मृत मान लिया गया।
- कर्नाटक के गांव मटौली अफजलपुर जिला गुलबर्गा के रहने वाले पति शिवलिगप्पा ने बच्चों के पालन पोषण के लिए दूसरी शादी कर ली।
- साल 2013 में सूरत की चैरिटेबल ट्रस्ट ने ललिता को सड़क से रेस्क्यू किया था। जगह की कमी होने की वजह से उसे भरतपुर के ‘अपना घर आश्रम’ में भेज दिया गया। तभी से उसका यहीं पर इलाज चल रहा था।
- इलाज की वजह से कुछ दिनों पहले ही ललिता की दिमागी हालत में सुधार हुआ और उसे अपने घर का पता याद आया।
- उसने इस बारे में अपना घर आश्रम प्रशासन को बताया। जिसके बाद प्रशासन ने कर्नाटक के अफजलपुर थाने में संपर्क किया और इस बात की जानकारी दी।
दूसरी पत्नी ने 16 श्रृंगार के साथ भेजा
- अफजलपुर थाने की पुलिस शिवलिगप्पा के घर पहुंची और ललिता के जीवित होने की जानकारी दी।
- शिवलिगप्पा ने ललिता से वीडियो कॉल पर बात की। जिसके बाद उनकी दूसरी पत्नी ने सम्मान के साथ पहली पत्नी को घर लाने के लिए आश्रम भेजा। उसने श्रृंगार का सामान भी साथ भेजा।
- आश्रम पहुंचे पति शिवलिगप्पा अपनी पत्नी को देख भावुक हो गए।
- उन्होंने पत्नी को सिंदूर का टीका लगाकर मंगल सूत्र पहनाया। फिर कंगन, झुमके, बाली और कपड़े पहनाकर उसका सोलह श्रृंगार किया और अपने साथ लेकर घर रवाना हो गए।
पहली पत्नी से 2 बेटे और 1 बेटी
शिवलिगप्पा ने बताया कि, वे सिक्योरिटी का काम करते हैं। साल 1994 में ललिता से उनकी शादी हुई थी, जिनसे उन्हें 2 बेटे और 1 बेटी थी। साल 2006 में ललिता घर से निकल गई थी। उसकी तलाश की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। घर में बच्चों को पालने वाला कोई नहीं था, शिवलिगप्पा के माता-पिता बुजुर्ग हो गए थे। इसलिए उन्होंने महानंदा के साथ दूसरी शादी कर ली। महानंदा ने ही बच्चों को संभाला, हमने दूसरा बच्चा नहीं किया। शिवलिगप्पा के दोनों बेटे नौकरी करते हैं और बेटी की शादी कर दी है।