
अगर आप भी ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, तो नई वेबसाइट से शॉपिंग करने से पहले सावधान हो जाएं क्योंकि अनवेरिफाइड ऐप, साइट या लिंक से शॉपिंग करने पर आप ठगी का शिकार हो सकते हैं। इसको लेकर केंद्र सरकार के केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना तकनीकी मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी- इन) ने एक्स पर पोस्ट कर बेस्ट प्रैक्टिसेस जारी की हैं। इसमें उन्होंने कहा है कि मैसेज या चैट के जरिए आने वाले लिंक या यूआरएल पर क्लिक करने से पहले उसे चैक कर लें कि वह लिंक वेरिफाइड है या नहीं। अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान ठगी का शिकार हो गए हैं तो इसकी शिकायत वेबसाइट https://www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। साथ ही 1930 पर कॉल कर ठगी की शिकायत कर सकते हैं।
ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए रखें ये सावधानियां
- सोशल मीडिया से प्राप्त होने वाली किसी भी लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक करने से बचें।
- चैट या मैसेज पर आने वाली शॉर्टेड लिंक पर क्लिक करने से पहले उसके बारे में जांच कर लें कि वह वेरिफाइड है या नहीं।
- हमेशा डोमेन नेम की जांच करें और चेक करें कि वह वैध है या नहीं।
- ऐप्स को जेनुइन एप्लीकेशन से ही डाउनलोड करें।
- फोन या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों के साथ फाइनेंशियल डिटेल शेयर न करें।
- वैध वेबसाइट से ही लेनदेन करें और वेब पेज के बारे में जांच करें कि वह https: से शुरू हो रही है या नहीं।
- हमेशा सुरक्षित कनेक्शन से ही ऑर्डर करें।
- उन ऑफर्स से सावधान रहें जो देखने में सच्चे लगते हैं और जल्दबाजी दिखाते हैं।
- खरीदारी के दौरान कोई भी जानकारी शेयर न करें।
कंपनियों को वेरिफाइड नहीं करता गूगल
गूगल पर काफी सारी ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां है, लेकिन गूगल इन कंपनियों को वेरिफाई नहीं करता है कि कौन-सी कंपनी जेनुइन है और कौन फ्रॉड है। वेरिफाइड वेबसाइट पर जिस प्रोडक्ट का रेट 600 रुपए होता है। वहीं प्रोडक्ट कुछ कंपनियां कम रेट में दिखाती हैं। ऐसे में लोग कम रेट उस प्रोडक्ट को खरीदते हैं और ऑनलाइन पेमेंट कर देते हैं, लेकिन पेमेंट करने के प्रोडक्ट आपके पास नहीं आता है। इससे बचने के लिए वेरिफाइड और पॉपलुर ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स से ही प्रोडक्ट ऑर्डर करें। वहीं नई कंपनी की लिंक या ऐप से ऑर्डर करने समय देखें कि जब आप पेमेंट करते हैं तो बैंक डिटेल डालने पर उसी कंपनी का नाम आ रहा है, जो नाम पोर्टल पर शो हो रहा है। किसी व्यक्ति या अन्य नाम तो नहीं आ रहा है यदि हो रहा है वहां पर पेमेंट न करें। – हेमराज सिंह चौहान, सीनियर कंसल्टेंट, आईटी एंड साइबर सिक्योरिटी
ऑर्डर करते समय चेक करें वेबसाइट का नाम
उन लिंक पर क्लिक न जो करें जो शॉर्टेड लिंक होती हैं, जिनमें कंपनी का नाम नहीं है, उन्हें इग्नोर करें। कई बार किसी वेरिफाइड वेबसाइट से मिलती- जुलती फैक वेबसाइट तैयार की जाती है, जिसका लोगो और नाम देखने में तो असली जैसा होता है, लेकिन उसके नाम में मिस्टेक होती है। इसलिए ऑनलाइन ऑर्डर करते समय नाम को अच्छे से चेक करें। गूगल प्ले स्टोर या अन्य किसी वेरिफाइड स्टोर्स से ही ऐप डाउनलोड करें। कई बार हमारे पास सोशल मीडिया पर लिंक आती है, जिससे हम ऐप डाउनलोड कर लेते हैं। यह अनवेरिफाइड होते हैं और इनसे फ्रॉड हो सकता है। फ्रॉड वेबसाइट्स द्वारा लोगों को फंसाने के लिए बेहद कम दाम में ऑफर दिए जाते हैं, लेकिन यह बेहद कम समय के लिए होते हैं। यह लोगों को ठगने के लिए किया जाता है। – रघु पांडे, आईटी एंड साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट