
नई दिल्ली। कांग्रेस ने चुनाव आयोग द्वारा चुनाव से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से रोकने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग को ऐसे महत्वपूर्ण कानूनों में बदलाव करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
केंद्र ने नियमों में किया संशोधन
चुनाव आयोग की सिफारिश पर 20 दिसंबर को कानून मंत्रालय ने द कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल- 1961 के नियम 93(2)(A) में संशोधन करते हुए पोलिंग स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज, वेबकास्टिंग रिकॉर्डिंग और उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे दस्तावेज सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी। यह नियम कहता है चुनाव संबंधी सभी दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेंगे, जिसमें संशोधन करते हुए ‘सभी दस्तावेज नियमानुसार सार्वजनिक होंगे’ कर दिया गया।
पारदर्शिता खत्म करने की कोशिश
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को X पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “पहले मोदी सरकार ने सीजेआई को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाले पैनल से हटा दिया और अब चुनावी जानकारी को जनता से छिपाने का प्रयास कर रही है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब कांग्रेस ने वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने और ईवीएम में पारदर्शिता की मांग की, तो चुनाव आयोग ने अपमानजनक लहजे में जवाब दिया और उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया।
फेक नरेटिव रोकने के लिए बदलाव- चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज और वेबकास्टिंग रिकॉर्डिंग जैसे दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से छेड़छाड़ और फर्जी नैरेटिव फैलने की संभावना है। एक अधिकारी ने कहा कि ये इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड ‘कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स’ के तहत नहीं आते, बल्कि पारदर्शिता के लिए होते हैं। ईसी ने यह भी स्पष्ट किया कि नामांकन फॉर्म, चुनाव एजेंट की नियुक्ति, रिजल्ट और इलेक्शन अकाउंट स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज ही सार्वजनिक किए जा सकते हैं।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के बाद हुआ बदलाव
अधिकारियों ने बताया कि यह बदलाव पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद किया गया। हाईकोर्ट ने हरियाणा विधानसभा चुनाव से जुड़े दस्तावेज याचिकाकर्ता के साथ साझा करने का निर्देश दिया था। इसमें सीसीटीवी फुटेज को भी नियम 93(2) के तहत सार्वजनिक करने का आदेश दिया गया था।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों, जैसे सीसीटीवी फुटेज और वेबकास्टिंग, को सार्वजनिक करने का नियम नहीं है। ये केवल पारदर्शिता के उद्देश्य से उपयोग किए जाते हैं और कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल के तहत नहीं आते।
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