
मुंबई। बदलापुर में दो बच्चियों के साथ यौन शोषण मामले के आरोपी अक्षय शिंदे के एनकाउंटर मामले में बुधवार (25 सितंबर) को बॉम्बे हाई कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा कि आरोपी के सिर पर गोली कैसे लगी, जबकि पुलिस को कहां गोली चलानी है, इसकी ट्रेनिंग दी जाती है। कोर्ट ने आगे कहा कि पुलिस को हाथ या पैर पर गोली चलानी चाहिए थी।
आरोपी की मौत मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए – HC
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी अक्षय शिंदे की मुठभेड़ में हुई मौत की जांच निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि अगर पुलिस ने पहले शिंदे को काबू करने की कोशिश की होती तो गोलीबारी से बचा जा सकता था और इस बात पर विश्वास करना बहुत मुश्किल है कि उसने एक पुलिस अधिकारी से पिस्तौल छीनकर गोलियां चलाईं।
आरोपी को पहले हाथ-पैर के बजाय सीधे सिर में गोली क्यों मारी गई – कोर्ट
- जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने कहा कि अगर उसे पता चला कि जांच ठीक से नहीं हो रही है, तो वह उचित आदेश पारित करने के लिए बाध्य होंगी।
- पीठ ने मामले को तीन अक्टूबर को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
- 03 अक्टूबर को पुलिस को शिंदे के पिता द्वारा संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग से संबंधित शिकायत पर निर्णय लेना है।
- हाई कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज तुरंत महाराष्ट्र अपराध जांच विभाग (CID) को सौंपने का भी निर्देश दिया, जो शिंदे की मौत की जांच करेगा।
- कोर्ट ने कहा- “फाइलें अब तक सीआईडी को क्यों नहीं सौंपी गईं? सबूतों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। आपकी ओर से किसी भी देरी से संदेह और अटकलें बढ़ेंगी।”
- पीठ ने गोलीबारी पर सवाल उठाए और कहा कि अगर पुलिस ने पहले शिंदे को काबू करने की कोशिश की होती तो इसे टाला जा सकता था।
- कोर्ट ने कहा कि हालांकि वह इस स्तर पर कोई संदेह नहीं जता रही है, लेकिन यह विश्वास करना बहुत मुश्किल है कि शिंदे ने एक पुलिस अधिकारी से पिस्तौल छीनकर गोलियां चलाईं।
- पीठ ने कहा कि पिस्तौल को खोलना और उससे गोली चलाना बहुत आसान नहीं है। अदालत 24 सितंबर को पुलिस गोलीबारी में मारे गए अक्षय शिंदे के पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने “फर्जी मुठभेड़” की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की मांग की है।
क्या है मामला ?
जानकारी के मुताबिक, घटना 12 और 13 अगस्त 2024 की है। आदर्श स्कूल में 23 साल के स्वीपर अक्षय शिंदे ने दोनों बच्चियों का यौन शोषण किया। जिसके बाद दोनों बच्चियां स्कूल जाने से डर रहीं थीं। माता-पिता को संदेह होने पर उन्होंने उनसे पूछताछ की तो पूरी बात सामने आई। एक बच्ची के माता-पिता ने उसी कक्षा की दूसरी लड़की के पेरेंट्स से संपर्क किया। जब डॉक्टर ने जांच की तो घटना के बारे में पता चला।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक शुभदा शितोले ने पॉक्सो का मामला होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की और टालती रही। जिसके बाद बच्ची के माता-पिता ने सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से बदलापुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। घटना के दो दिन बाद 16 अगस्त को केस दर्ज किया गया। वहीं, अगले ही दिन 17 अगस्त को आरोपी को गिरफ्तार किया गया। 1 अगस्त को ही आरोपी अक्षय, स्कूल में कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त हुआ था।
बदलापुर एनकाउंटर
पुलिस के अनुसार, 23 सितंबर की शाम करीब साढ़े पांच बजे अक्षय शिंदे को उसकी पूर्व पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस वाहन में नवी मुंबई की तलोजा जेल से बदलापुर ले जाया जा रहा था। जांच के बाद जेल लौटते समय आरोपी ने असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) निलेश मोरे की रिवॉल्वर छीनी। आरोपी ने 3 गोलियां चलाईं। 1 गोली API मोरे की जांघ पर लगी। SI संजय शिंदे ने गोली चलाई, जो आरोपी के सिर पर लगी। क्राइम ब्रांच आरोपी शिंदे को अस्पताल लेकर पहुंची। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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