
छतरपुर जिले के गढ़ीमलहरा के बारी गांव में बुधवार रात को एक बड़ी घटना घटी, जब बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति की चोरी हो गई। सुबह जब ग्रामीणों ने मूर्ति को गायब देखा, तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। इस घटना के बाद भीम आर्मी के कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और धरने पर बैठ गए, वहीं पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
गांव में तनाव का माहौल
एएसपी विदिता डांगर ने बताया कि ग्रामीणों ने कुछ संदिग्धों के नाम बताए हैं और पुलिस इस दिशा में जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी और मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इस घटना ने गांव में तनाव का माहौल बना दिया है, खासकर तब जब मूर्ति स्थापना को लेकर पहले से ही कुछ विवाद चल रहा था।
मूर्ति स्थापना पर विरोध
मूर्ति चोरी के मामले में अहम जानकारी सामने आई है। रहवासी जयप्रकाश ने बताया कि कुछ लोग पहले से ही बाबा साहब अंबेडकर की मूर्ति स्थापना का विरोध कर रहे थे। ओमप्रकाश अहिरवार ने खुलासा किया कि कुछ लोग विवादित भूमि पर अतिक्रमण करना चाहते थे, जिसको लेकर गांव में पहले से ही विवाद चल रहा था। अहिरवार समाज ने इस मामले में पहले कलेक्टर की जनसुनवाई में भी शिकायत की थी, जो अब मूर्ति चोरी की घटना के संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
जमीन पर कब्जे की कोशिश
डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर दर्ज जमीन का विवाद भी इस मामले से जुड़ा हुआ है। दस्तावेजों के मुताबिक, विवादित भूखंड का कुल रकबा 3.237 हेक्टेयर है, जिसमें से 0.650 हेक्टेयर जमीन डॉ. अंबेडकर के नाम पर है। यह भूमि वर्तमान में गांव के कुछ दबंग लोग कब्जा करना चाहते थे, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया है। इस बीच, 10 मार्च को अहिरवार समाज ने गांव के स्कूल के पास हर्रई रोड पर बाबा साहब अंबेडकर की मूर्ति स्थापित की थी, जिसमें आसपास और जिले के लोग ढोल-नगाड़ों के साथ बड़ी संख्या में शामिल हुए थे।
अहिरवार समाज ने की कार्रवाई की मांग
मूर्ति चोरी की घटना ने अहिरवार समाज को आक्रोशित कर दिया है और उन्होंने पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। समाज के लोग इस घटना को केवल एक चोरी नहीं, बल्कि एक सांप्रदायिक षड्यंत्र मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह घटना उनके समाज और बाबा साहब अंबेडकर की विरासत के प्रति अनादर का प्रतीक है।
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