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महाकाल की सवारी में 'शाही' शब्द पर विवाद, नाम बदलने की उठी मांग, जानें कहां से उठा मुद्दा?

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महाकाल की सवारी में 'शाही' शब्द पर विवाद, नाम बदलने की उठी मांग, जानें कहां से उठा मुद्दा?
उज्जैन। बाबा महाकाल की शाही सवारी को लेकर विवाद शुरू हो गया। अब इस सवारी के ‘शाही’ शब्द पर आपत्ति उठ गई है। साधु-संतों ने ‘शाही’ नाम को बदलने की मांग उठाई है। लोगों का मानना है कि 'शाही' शब्द इस्लामिक है और इसे 'दिव्य' या 'भव्य' से बदलना चाहिए। इसके बाद से बीजेपी और कांग्रेस के बीच वार पलटवार शुरू हो गया। दरअसल, बीजेपी के प्रवक्ता ने बाबा महाकाल की शाही सवारी से 'शाही' शब्द हटाने की मांग की है। उन्होंने यह मांग सीएम मोहन यादव से की है। ऐसे में बीजेपी प्रवक्ता की मांग का कांग्रेस ने विरोध किया है। जिस पर सियासत शुरू होती दिख रही है।

बीजेपी प्रवक्ता ने 'शाही' शब्द हटाने की मांग

दरअसल, बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता यशपाल सिंह सिसोदिया ने 'शाही' शब्द हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह शाही शब्द हटाया जाना चाहिए। भाजपा के पूर्व विधायक यशपाल सिसोदिया संतों के समर्थन में आए है। उन्होंने कहा कि शाही शब्द इस्लामिक है। उन्होंने सीएम मोहन से नाम बदलने की मांग की है।

मुख्यमंत्री से करेंगे बात : धर्मेंद्र लोधी

मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति और धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने कहा है कि साधु-संतों ने मांग की है तो निश्चित तौर पर वह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बात करेंगे। शाही शब्द की जगह नए शब्द का प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके पहले भी केंद्र और राज्य की सरकारों ने कई गुलामी के प्रतीक शब्दों को शब्दावली से हटाया है। शाही की जगह कौन से शब्द का इस्तेमाल करें, इसे लेकर संतों से चर्चा करने के बाद फैसला लिया जाएगा।

कांग्रेस ने साधा निशाना

वहीं बीजेपी की मांग का कांग्रेस ने विरोध किया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अभिनव बरौलिया का कहना है कि बाबा महाकाल ही संसार के पालनकर्ता हैं, पहले भी वही थे आज भी वही है आगे भी वही रहेंगे। इसलिए नाम चेंज करने की ये भाजपा की प्रथा चली आ रही है। पहले राम कृष्ण और अब शिव के नाम पर राजनीति, ये गलत है। यह बीजेपी की गुटबाजी है और एक दूसरे के प्रति नाराजगी जताती है। धर्म में राजनीति सही नहीं है। केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार है, चाहे जितने, जिसका नाम बदले, इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है।

उज्जैन जनसंपर्क विभाग ने लिखा नया शब्द

श्रावण-भादो मास में महाकाल की अंतिम शाही सवारी आज निकाली जा रही है। इधर, उज्जैन के जनसंपर्क ने भी महाकाल की शाही सवारी को लेकर संदेश जारी कर दिया है। उज्जैन जनसंपर्क विभाग द्वारा सोमवार को जारी प्रेस नोट में इसे ‘राजसी' सवारी लिखा गया है। इसके पहले रविवार को जारी प्रेस नोट में शाही सवारी लिखा गया था।

संतों ने की है मांग

दरअसल, हर साल श्रावण-भादो मास के प्रत्येक सोमवार को महाकाल की सवारी निकलती है। इसमें महाकाल पालकी में सवार होकर प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। महाकाल की अंतिम सवारी सबसे भव्य होती है, इसलिए इसे ‘शाही सवारी’ कहा जाता है। लेकिन अब ‘शाही’ कहने पर उज्जैन के संतों, विद्वानों और अखाड़ों के साधुओं में असहमति व आक्रोश है। भागवत आचार्यश्री भीमाशंकर जी शास्त्री ने धर्म सभा में शाही नाम को बदलने की मांग उठाई थी। साधु संतों का कहना है कि महाकाल की सवारी को ‘शाही सवारी’ न कहा जाए। इसके स्थान पर संस्कृत या हिंदी का कोई उपयुक्त शब्द प्रचलन में लाया जाए।
Mithilesh Yadav
By Mithilesh Yadav

वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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