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इंजीनियर ने ऑस्ट्रेलियन सिटीजन से की 1 करोड़ की धोखाधड़ी, साल भर बाद भी पुलिस पूरी नहीं कर सकी जांच, हफ्ते भर में केस डायरी पेश करने के आदेश 

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इंजीनियर ने ऑस्ट्रेलियन सिटीजन से की 1 करोड़ की धोखाधड़ी, साल भर बाद भी पुलिस पूरी नहीं कर सकी जांच, हफ्ते भर में केस डायरी पेश करने के आदेश 
इंदौर। ऑस्ट्रेलियाई नागरिक पॉल शेपर्ड के साथ एक करोड़ रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी के मामले में अन्नपूर्णा पुलिस डेढ़ साल तक जांच नहीं कर पाई। मामला आखिरकार अदालत तक पहुंचा। हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने सुनवाई के दौरान जांच में चल रही लापरवाही को लेकर पुलिस को जमकर फटकारा। कोर्ट ने साइबर सेल थाने को एक सप्ताह के भीतर केस डायरी कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने इस इस केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को भी अदालत में तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

झांसा देकर हड़प लिए एक करोड़ से ज्यादा

फरियादी पॉल शेपर्ड के एडवोकेट गगन बजाड के मुताबिक पेशे से अकाउंटेंट पॉल ने अपने अकाउंट के लिए सॉफ्टवेयर बनाने का विज्ञापन दिया था। इसके बाद इंदौर के सॉफ्टवेयर इंजीनियर मयंक सलूजा ने उनसे संपर्क किया। दोनों के बीच 50 हजार रुपए में सॉफ्टवेयर बनाने की डील हुई। बाद में मयंक ने शेपर्ड को अपने झांसे में लेकर लगभग 1 करोड़ की चपत लगा दी।

एप्पल के सीईओ का बनाया फर्जी एग्रीमेंट

पॉल शेपर्ड को भरोसे में लेने के लिए इंदौर के मयंक सलूजा ने कहा कि उसके द्वारा तैयार सॉफ्टवेयर केवल विंडोज पर चलता है। इसे लेकर पॉल ने मयंक से कहा कि उसे मैकबुक पर सपोर्ट वाला सॉफ्टवेयर चाहिए। इसको देखते हुए मयंक ने एप्पल के सीईओ का फर्जी एग्रीमेंट बनवाया। लगभग 4 साल तक मयंक ने पॉल का सॉफ्टवेयर नहीं बनाया। जब पॉल को शक हुआ तो वह सिडनी स्थित एप्पल के ऑफिस पहुंचा और उन्हें सच्चाई का पता चला। जिसके बाद उन्होंने इंडिया के अपने दोस्त रुपेश शर्मा से बात कर अन्नपूर्णा थाने में ई-मेल के जरिए शिकायत भेजी। इसके बाद साइबर सेल थाने में एफआईआर दर्ज हुई।

भूलने की बीमारी का उठाया फायदा

इस डील का पहला पेमेंट सितंबर 2018 में हुआ था। मयंक ने 200 ऑस्ट्रेलियन डॉलर्स (11000 रुपए) ऑनलाइन पेमेंट के जरिए अपने खाते में डलवाए थे। 29 नवंबर 2018 को शेपर्ड ने अपनी अनोखी बीमारी के बारे में मयंक को बताया। शेपर्ड ने कहा कि उन्हें ब्रेन कैंसर हैं और उन्हें कोई बात ज्यादा समय तक याद नहीं रहती। इसी बात का फायदा उठाकर मयंक ने 4 साल में पॉल के खाते से 1 लाख 77 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग एक करोड़ रुपए) अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए। मयंक ने एप्पल कंपनी के लेटर हेड पर सीईओ टिम कुक के जाली साइन कर एग्रीमेंट भी बनवाया। जिसके कारण शेपर्ड पूरे झांसे में फंस गया। (इनपुट- हेमंत नागले) ये भी पढ़ें-Vadodara Boat Accident : वडोदरा नाव हादसे में 18 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज, 16 की कैपेसिटी वाली बोट में बैठाए थे क्षमता से ज्यादा; चालक और मैनेजर गिरफ्तार
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By People's Reporter
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