
भोपाल। केंद्र सरकार ने एम्स भोपाल को हार्ट ट्रांसप्लांट की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह सेंट्रल इंडिया का पहला संस्थान है, जहां हार्ट ट्रांसप्लांट हो सकेगा। इसके साथ ही लंग्स ट्रांसप्लांट की अनुमति भी मिल गई है। ब्रेनडेड मरीज के अंगदान के लिए परिवार की अनुमति के बाद लंग्स और हार्ट को दूसरे राज्यों के मरीजों को भेजना पड़ता था। कई बार दूरी ज्यादा होने पर यह अंग उपयोग लायक नहीं होते थे।
यह जानकारी एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने सोमवार को दी। मालूम हो कि प्रदेश में अब तक लिवर, किडनी व बोन मैरो ट्रांसप्लांट की ही व्यवस्था है। विशेषज्ञों के मुताबिक शहर में करीब 20 हजार मरीजों को हार्ट फेलियर का खतरा है। हार्ट फेलियर की स्थिति में हार्ट ट्रांसप्लांट सबसे बेहतर विकल्प है। ट्रांसप्लांट के बाद 12 से 15 साल तक उम्र बढ़ जाती है।