
भोपाल। लोकसभा चुनाव संपन्न होने और तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का गठन होते ही राष्ट्रीय स्तर से लेकर मध्यप्रदेश में भी पार्टी अध्यक्ष की ताजपोशी को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल जून तक बढ़ाया गया था। उनके केंद्र में मंत्री बन जाने के बाद जल्दी ही कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकती है। मप्र भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा के उत्तराधिकारी की नियुक्ति अभी कम से कम 6 महीने और टलने की संभावना है।
जुलाई से संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया और सदस्यता अभियान शुरू हो जाएगी। अध्यक्ष पद की रेस में पार्टी के कई दिग्गज नेताओं के नाम चल रहे हैं। भाजपा हाईकमान ने फरवरी 2020 में मप्र में नया प्रयोग करते हुए युवा नेता विष्णुदत्त शर्मा को पार्टी की कमान सौंपकर सभी को चौंका दिया था। उनका कार्यकाल 2023 में ही पूरा हो गया था लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनाव के चलते कार्यकाल आगे बढ़ा दिया गया।
अध्यक्ष की नियुक्ति में लग जाएंगे 6 महीने
लोकसभा चुनाव के बाद ऐसी संभावना थी कि शर्मा को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ इसलिए इस बात की पूरी संभावना है कि नए अध्यक्ष की ताजपोशी में लगभग 6 महीने का समय लग जाएगा।
यह भी है संभावना
इस बीच में यदि शर्मा को सत्ता-संगठन में कोई अहम जिम्मेदारी देकर पुनर्वास किया गया तो इसके पहले कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त हो सकता है जिसे बाद में चुनावी प्रक्रिया के तहत विधिवत चुन लिया जाएगा। इस प्रक्रिया में लगभग 6 से 8 महीने का समय लग जाएगा।
ये हैं संभावित दावेदार
प्रमुख दावेदारों में कई दिग्गजों के नाम हैं। इनमें ट्राइबल और अजा वर्ग के भी हो सकते हैं। अजजा वर्ग से फग्गन सिंह कुलस्ते और सांसद सुमेर सिंह सोलंकी। सामान्य वर्ग से प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा और जयभान सिंह पवैया के नाम हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
पार्टी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति का मामला स्पष्ट हो पाएगा। कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत होगा अथवा निचले स्तर से चुनावी प्रक्रिया के बाद ताजपोशी होगी यह अभी भविष्य के गर्त में है। अगले साढ़े चार साल तक प्रदेश में चुनाव नहीं है इसलिए पार्टी नया प्रयोग भी कर सकती है।
नड्डा को मिला था विस्तार
नड्डा का कार्यकाल 2023 में पूरा हो गया था जिसे चुनाव के बाद जून महीने तक विस्तार दे दिया गया । अब ऐसी संभावना है कि केंद्र में रुटीन कामकाज के लिए कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकती है। संगठन की चुनावी प्रक्रिया के तहत मंडल और जिले के बाद प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होगा। देश के 50 फीसदी राज्यों के चुनाव होने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो जाएगा। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को जब गृहमंत्री बनाया गया था तब जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष की जवाबदारी सौंपी गई थी। बाद में चुनावी प्रक्रिया के बाद उन्हें ही अध्यक्ष चुन लिया गया।