
भोपाल। ये कहानी बिलकुल फिल्मी है, बस जगह और किरदार बदल गए हैं। फिल्म स्पेशल 26 में अक्षय कुमार और उसके साथी नकली अफसर बनकर युवाओं को नौकरी का झांसा देकर ठगते थे, ठीक उसी तरह एमपी में दो शातिर जालसाज खुद को रेलवे बोर्ड का अफसर बताकर युवाओं को अपने शिकंजे में फांसते थे। दो दर्जन से ज्यादा युवाओं के साथ इन्होंने नौकरी देने के नाम पर 35 लाख की ठगी की। लोगों को किसी प्रकार का शक न हो, लिहाजा इन शातिरों ने युवाओं को भोपाल बुलाकर उन्हे एक घर में ठहराया और रेलवे स्टेशन पर भी घुमाया। लेकिन आखिरकार इस गोरखधंधे का पर्दाफाश हो ही गया। पुलिस ने आरोपियों से एक लैपटॉप और 2 फर्जी सीलें भी जब्त की हैं।
ऐसे बेनकाब हुए ठग
इस तरह की ठगी के मामले की शिकायत इंदौर निवासी प्रीतपाल सिंह बाधवा ने लगभग 4 माह पहले क्राइम ब्रांच भोपाल में की थी। प्रीतपाल ने पुलिस को बताया कि एक परिचित व्यक्ति संदीप दास के जरिए वह नीरज नेल्सन से मिला था। नीरज ने खुद को रेलवे बोर्ड का अधिकारी बताते हुए उनके बेटे प्रतीक सिंह बाधवा की रेलवे में नौकरी लगवाने का झांसा दिया और फर्जी अपाइंटमेंट लेटर देकर 8 लाख 35 हजार रुपये ठग लिए। जब पता चला कि लेटर फर्जी है तो उन्होंने संदीप और नीरज से पैसे वापस मांगे। पहले तो दोनों पैसे लौटाने की बात कहते रहे, लेकिन एकाएक दोनों गायब हो गए। शिकायत मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर पिछले दिनों एक आरोपी संदीप दास को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि नीरज फरार चल रहा था। बुधवार को क्राइम ब्रांच ने नेल्सन को सागर जिले के गढ़ाकोटा से हिरासत में ले लिया।
अदने से कर्मचारी से शातिर जालसाज बनने की कहानी
नीरज नेलमसन नाम का युवा भोपाल के हाईपर सिटी नाम स्टोर पर काम करता था, लेकिन आमदनी में अपने शौक पूरे नहीं कर पाता था। फिल्मों से प्रेरित होकर उसने अपने साथी संदीप दास के साथ मिलकर रेलवे में नौकरी लगवाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी का प्लान बनाया। इसके लिए उसने लैपटाप और प्रिंटर खरीदा और रेलवे के जॉइनिंग ऑर्डर और आईकार्ड के नमूनों को गूगल के जरिए खोजा। नेल्सन ने इसके बाद डीआरएम भोपाल की फर्जी सील और प्रिंटेड टीशर्टें बनवाईं। जिसके बाद वह रेलवे के फर्जी नियुक्ति आदेश पर फर्जी सील और हस्ताक्षर कर देने लगा। इसके लिए वह हर युवा से 3 से 9 लाख रूपए तक लेता था।
भरोसा बनाने के लिए ये पैंतरा भी अपनाया
नेल्सन अपने साथी संदीप के साथ मिलकर जिन युवाओं को नौकरी लगवाने का झांसा देता था उन्हें भोपाल के करोंद इलाकें में किराए के मकान में ठहराता। इन युवाओं को वह रेलवे की टीशर्टें पहनाकर रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों की विजिट तक कराता था। युवाओं को शक न हो इसलिए उनका सेलरी एकाउंट खुलवाकर कुछ महीने तक पैसे भी जमा करता था। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि नेल्सन ने अपने साथी के साथ इंदौर, खंडवा और बैतूल के एक दर्जन से ज्यादा बेरोजगारों के साथ तकरीबन 35 लाख की ठगी की है। एडिशनल डीसीपी क्राइम शैलेंद्र सिंह को उम्मीद है कि इन आरोपियों से और भी ठगी की वारदातों का खुलासा होगा।
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— Peoples Samachar (@psamachar1) May 4, 2023