
चित्रकूट (सतना)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को सतना जिले के चित्रकूट में आयोजित नानाजी देशमुख की 15वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद नेहरू और कांग्रेस सरकार ने पश्चिमी सिद्धांतों का हिंदीकरण कर नीतियां बनाई, जबकि नानाजी देशमुख और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानवतावाद का सिद्धांत प्रस्तुत कर ‘सर्वश्रेष्ठ भारत’ की कल्पना को साकार किया।
इस दौरान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं लोकसभा सांसद वीडी शर्मा और प्रसिद्ध संत मुरारी बापू भी मौजूद रहे।
नानाजी ने राष्ट्रसेवा में अपना जीवन समर्पित किया : शाह
अमित शाह ने दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा स्थापित पंडित उपाध्याय की प्रतिमा का लोकार्पण भी किया। शाह ने कहा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो युगों तक अपना प्रभाव छोड़ते हैं और समाज में परिवर्तन लाने का कार्य करते हैं। नानाजी देशमुख भी ऐसे ही व्यक्तित्व थे, जिन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में जनसंघ की नींव रखी और अपना पूरा जीवन भारत माता की सेवा में समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा, “राजनीति में अजातशत्रु बनकर दुनिया से जाना कठिन होता है, लेकिन नानाजी देशमुख के लिए कभी किसी से कोई गलत बात नहीं सुनी गई। उन्होंने कला, साहित्य, उद्योग, राजनीति और सेवा के हर क्षेत्र में स्वीकृति और सम्मान पाया। एक जीवन में इतना कुछ कर पाना बहुत कठिन होता है।”
शाह बोले- नेहरू सरकार की नीतियों में…
अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब देश आजाद हुआ और नई नीतियां बनीं, तब भारत को मानने वाले सभी लोग दुखी और चिंतित थे। उन्होंने कहा कि जनसंघ ने दो महापुरुष दिए, दोनों 1916 में जन्में, नानाजी देशमुख और दीनदयाल उपाध्याय। जब देश आजाद हुआ और देश की नीतियां बनीं, तब भारत को मानने वाले सभी लोग आश्चर्यचकित होकर बड़े दुख और चिंता के साथ देख रहे थे क्योंकि देश की विदेश, कृषि, शिक्षा, अर्थ, नीति किसी में भी चिरपुरातन राष्ट्र की मिट्टी की सुगंध नहीं थी। पश्चिम से उठाए सिद्धांतों को हिंदीकरण कर नीति बनाने का संतोष जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस सरकार ने किया।
उस वक्त पंडित दीनदयाल ने एकात्म मानववाद के सिद्धांत प्रस्तावित कर भारत का आर्थिक दर्शन और विदेश नीति कैसी हो, ये सिद्धांत प्रतिपादित किया। वही सिद्धांत आज भारत को सर्वश्रेष्ठ बना रहा है। भारत के विकास के मॉडल को पंडित दीनदयाल ने अंत्योदय के नाम से प्रस्तावित किया। विकास हो, पर विरासत को साथ रखकर हो। ये दोनों सिद्धांत उन महापुरुषों ने दिए।
नानाजी का योगदान वेद-उपनिषद जैसा : शाह
अमित शाह ने कहा कि बहुत से लोग एकात्म मानववाद को मानते तो थे, लेकिन उसे जमीन पर उतारना असंभव मानते थे। लेकिन बीते 10 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 60 करोड़ गरीबों को जीवन की हर सुविधा देकर इस विचारधारा को साकार किया।
उन्होंने बताया कि नानाजी देशमुख ने चित्रकूट में ग्रामीण विकास के लिए कई योजनाओं को आगे बढ़ाया। उनके द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान की मासिक पत्रिका ‘मंथन’ भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए वेद और उपनिषद के समान है।
नानाजी ने दल नहीं, राष्ट्र को प्राथमिकता दी : शाह
शाह ने कहा कि कई बार एक छोटा सा काम देश को बहुत बड़े संकट से बचा लेता है, जब जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हुआ, तब बहुत से लोग निराश थे। लेकिन नानाजी देशमुख ने ‘राष्ट्र प्रथम’ का सिद्धांत अपनाकर जनता पार्टी को मजबूती दी।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, “नानाजी देशमुख ने बलरामपुर से चुनाव लड़ा और वहां की महारानी को हराया। जीतने के बाद वे महारानी के घर पहुंचे और उनसे विनम्रता से सहयोग मांगा। यह हर नेता के लिए एक पथ-प्रदर्शक घटना है।” पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने नानाजी देशमुख को ‘राष्ट्रऋषि’ की उपाधि दी थी।
आज की राजनीति में लोग फोटो के लिए परेशान रहते हैं : शाह
अमित शाह ने बिना किसी का नाम लिए आज की राजनीति पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में लोग स्टेज पर दूसरे नंबर की सीट मिलने से ही निराश हो जाते हैं, या अखबार में फोटो ठीक से न छपे तो परेशान हो जाते हैं। लेकिन नानाजी देशमुख ने कभी व्यक्तिगत स्वार्थ की चिंता नहीं की। उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्रसेवा में समर्पित कर दिया। गोरखपुर में पहला ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ उन्होंने ही खोला और संस्कृतिक राष्ट्रवाद को अपने जीवन में साकार किया।
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