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Earthquake in Himachal Pradesh : सिक्किम के बाद अब हिमाचल में फिर हिली धरती, मंडी में आया भूकंप, 3 बार महसूस हुए झटके

मंडी। सिक्किम के बाद हिमाचल प्रदेश के मंडी में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.3 मापी गई। जमीन के अंदर इसकी गहराई 5 किलोमीटर रही। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, सुबह 9 बजकर 53 मिनट पर 3 बार हल्के झटके महसूस किए गए। जिससे, लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, तीव्रता कम होने की वजह से ज्यादातर लोग इन्हें महसूस नहीं कर पाए। इससे पहले सिक्किम के सोरेंग में 4.4 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। फिलहाल, दोनों जगह किसी के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

सिक्किम के सोरेंग में आया भूकंप

इससे पहले शुक्रवार सुबह-सुबह सिक्किम के सोरेंग में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.4 मापी गई। सोरेंग में भूकंप के झटके सुबह 6 बजकर 57 मिनट पर महसूस किए गए। वहीं भूकंप का असर बिहार के किशनगंज में भी दिखा। भूकंप का केन्द्र सिक्किम में बताया जा रहा है।

7.1 की तीव्रता के भूकंप से कांपा जापान

जापान में एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। गुरुवार को कई शहरों में इसके झटके महसूस हुए थे। रिक्टर स्केल पर 7.1 तीव्रता मापी गई। भूकंप के साथ ही सुनामी का अलर्ट भी जारी किया गया। भूकंप का केंद्र जापान का क्यूशू शहर में जमीन से करीब 8.8 किमी नीचे बताया। भूकंप के ये झटके जापान के क्यूशु और शिकोकू द्वीपों पर महसूस किए गए थे। जापान के तटीय इलाकों मिायजाकी, कोची, इहिमे, कागोशिमा और आइता में सुनामी को लेकर अलर्ट जारी किया गया था। क्योंकि क्यूशु के मियाजाकी में समुद्र की 20 सेंटीमीटर ऊंची लहरे उठती देखी गईं।

आखिर क्यों आते हैं भूकंप ?

भूकंप आने के पीछे की वजह पृथ्वी के भीतर मौजूद प्लेटों का आपस में टकराना है। हमारी पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती हैं। जब ये आपस में टकराती हैं, तब फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है। जिसकी वजह से सतह के कोने मुड़ जाते हैं और वहां दबाव बनने लगता है। ऐसी स्थिति में प्लेट के टूटने के बाद ऊर्जा पैदा होती है, जो बाहर निकलने के लिए रास्ता ढूंढती है। जिसकी वजह से धरती हिलने लगती है।

कैसे मापते हैं भूकंप की तीव्रता

रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र (एपीसेंटर) से मापा जाता है। भूकंप को लेकर चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है। मैक्रो सेस्मिक जोनिंग मैपिंग के अनुसार इसमें जोन-5 से जोन-2 तक शामिल है। जोन 5 को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है और इसी तरह जोन दो सबसे कम संवेदनशील माना जाता है।

किस तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक है

• 0 से 1.9 तीव्रता का भूकंप काफी कमजोर होता है। सीज्मोग्राफ से ही इसका पता चलता है।
• वहीं 2 से 2.9 तीव्रता का भूकंप रिक्टर स्केल पर हल्का कंपन करता है।
• 3 से 3.9 तीव्रता का भूकंप आने पर ऐसा लगता है जैसे कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर गया हो।
• 4 से 4.9 तीव्रता का भूकंप आने पर खिड़कियां टूट सकती हैं। साथ ही दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं।
• 5 से 5.9 तीव्रता का भूकंप आने पर घर का फर्नीचर हिल सकता है।
• 6 से 6.9 तीव्रता का भूकंप आने पर इमारतों की नींव दरक सकती है।
• 7 से 7.9 तीव्रता का भूकंप खतरनाक होता है। इससे बिल्डिंग गिर जाती हैं और जमीन में पाइप फट जाती है।
• 8 से 8.9 तीव्रता का भूकंप काफी खतरनाक होता है। जापान, चीन समेत कई देशों में 8.8 से 8.9 तीव्रता वाले भूकंप ने खूब तबाही मचाई थी।
• 9 और उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आने पर पूरी तबाही होती है। इमारतें गिर जाती है। पेड़ पौधे, समुद्रों के नजदीक सुनामी आ जाती है।

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